जो सिफत बाप में होती है कमोबेश वही सिफत औलाद में पाई जाती है - मुफ्ती अकरम
दोआइया मजलिस बराए उबाल ए सवाब मोहम्मद अलाउद्दीन खां मरहूम इब्न मोहम्मद वाएज़ुल हक़ खां मरहूम से उलमा का खिताब।
मोहम्मद ग़ुलाम सरवर
जमुई, बिहार।
जमुई ज़िला के इस्लाम नगर अलीगंज प्रखंड स्थित कैयार पंचायत के ज़ख़ीरा (जखड़ा) गांव में मास्टर मोहम्मद इरशाद आलम के आवास परिसर में मंगलवार कि रात्रि एक बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में शानदार प्रोग्राम आयोजित हुई। यह प्रोग्राम एक दोआइया मजलिस बराए ईसाल ए सवाब मोहम्मद अलाउद्दीन खां मरहूम इब्न मोहम्मद वाएज़ुल हक़ खां मरहूम की आत्मा की शांति के लिए आयोजित की गई। प्रोग्राम हाजी मोहम्मद साद उल्लाह खां सेवा निवृत्त हाईस्कूल शिक्षक की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस कार्यक्रम का बाज़ाब्ता आग़ाज़ हाफ़िज़ व क़ारी निज़ामुद्दीन झाझा जमुई ने क़ुरआन मोक़द्दस की आयत तिलावत फरमा कर की। और नात मुक़द्दसा हाफ़िज़ मोहम्मद अरमान व हाफ़िज़ उमर खपरिया सोनो जमुई ने पेश किया। प्रोग्राम की नक़ाबत बहुस्न खूबी के साथ क़ारी मोहम्मद जहांगीर खतीब व एमाम जामा मस्जिद खपरिया सोनो जमुई ने अंजाम दिया।
दोआइया मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना व मुफ्ती अकरम साहब गिरिडीह झारखंड ने कहा कि जो औसाफ बाप में होती है, मुमकिन है कमोबेश वही सिफत उनके औलाद में मुन्तक़िल होती है। उन्होंने कहा कि इनसान यहां हमेशा रहने के लिए नहीं आया है तय व अटल है एक दिन इसे यहां से दुनिया की तमाम आरामो आराएश और रंगीन फिज़ाओं को छोड़ कर जाना है । इस लिए हमें चाहिए कि हम नेक आमाल करें, अच्छे एख़लाक़ मोहब्बत, हुस्न सलूक, भाई चारगी और मुन्सिफाना राह पर गामज़न रहें। जब इनसान इस दुनिया से चला जाता है तो उसके अच्छे बुरे आमाल ही काम आते हैं , वही उसके साथ जाती हैं। उन्होंने कहा कि हमें उतनी ही फुर्सत मिली है जितनी तकबीर के बाद फ़र्ज़ नमाज़ के लिए है। जिस वक़्त इनसान पैदा होता है उसी वक़्त अज़ान और तकबीर कह दी जाती है, सिर्फ नमाज़ बाक़ी रह जाती है इस से साफ ज़ाहिर होता है कि हम दुनिया में बहुत कम वक़्त के लिए आए हैं।जब मौत का वक़्त आता है तो एक पल भी टल नहीं सकती है।
उन्होंने मज़ीद कहा कि जो शख्स अल्लाह और रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के हुक्म को मानेगा उस पर अमल पैरा रहेगा उसे जन्नत में आला मक़ाम मिलेगा और नबी हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ज़्यारत नसीब होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया कि सबसे अक़्लमंद वह शख्स है जो मरने से पहले मौत को याद करे और उसकी तैयारी करे।
दोआइया मजलिस में झारखंड से तशरीफ़ लाए हिन्दुस्तान के मशहूर व मारूफ शायर हाफ़िज़ व क़ारी जनाब जमशेद जौहर धनबाद झारखंड ने नातिया कलाम पेश कर अपने मोतरन्नुम आवाज़ से लोगों का दिल जीत लिया और खूब दाद व तहसीन हासिल किया साथ ही लोगों को साथ गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया।
इस मौक़े पर जमशेदपुर से तशरीफ़ लाए बिहार एजुकेशनल कांफ्रेंस के रूह रवां जेएनयू,व जेएमयू और ए एम यू के साबिक़ स्टुडेंट लिडर एस एम तैयब असग़र ने गिरती तालीमी निज़ाम पर अपनी गहरी फ़िक्र व ख़्यालात ज़ाहिर करते हुए बेहतर तालीमी निज़ाम क़ाएम करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि क़ौम की बेहतरी और इसलाह मुआसरा के लिए बेहतर व मुस्तहकम तालीमी निज़ाम क़ायम करना ज़रूरी है। हमें चाहिए कि समाज में इत़्तहाद यकजहती बनाएं और एक दूसरे के ग़म में हमेशा शरीक रहें। हमारे मरहूमीन की सच्ची ख़राज तभी मुमकिन है जब हम समाज में अमनो अमान क़ायम रखेंगे। साथ ही हमें चाहिए कि हम एक ऐसा तालिमी निज़ाम क़ायम करें जिससे गांवों के बच्चे आसानी से अच्छी तालीम व तरबियत हासिल कर सके। इस मौक़े पर हिन्दुस्तान के मशहूर शायर अमान ज़ख़ीरवी के तख़लीक़ की गई सौ अशआर पर मुशतमिल नवाह नाम के किताब की रस्म रूनामाई भी की गई।
इस प्रोग्राम में मोहम्मद इबरार खां, प्रोफेसर मोहम्मद सलाह उद्दीन खां रिटायर प्रिंसिपल डी एस कालेज सिकंदरा, वाएज़ुल हक़ एजुकेशनल सोशल वेलफेयर चेरीटेबल ट्रस्ट रहमत नगर, ज़ख़ीरा के बानी व सेक्रेटरी मोहम्मद ग़ुलाम सरवर सहाफी पत्रकार,समाजी रहनुमा ज़ेड अली भुट्टो,हाजी मोहम्मद शहाबुद्दीन खां रिटायर शिक्षक, डाक्टर मोहम्मद नौशाद अख़्तर, हाफ़िज़ मोहम्मद एहतेशाम उद्दीन खां, हाजी मोहम्मद फिरोज़ खां, मोहम्मद शमीम उद्दीन खां साबिक़ पंचायत समिति मेम्बर कैयार पंचायत, मुखिया ललन सिंह, दीननगर पंचायत के साबिक़ मुखिया ओबैद उल्लाह खान, मोहम्मद तौहीद खां, सोशल एक्टिविस्ट औरंगज़ेब खां, फखरूद्दीन राईन, मोहम्मद समदानी, मास्टर मोहम्मद शादाब राज़ी, मोहम्मद जमील अहमद खान, मोहम्मद तनवीर अहमद खान, मोहम्मद रिज़वान आलम खान, मास्टर मोहम्मद जावेद अख्तर खान, मोहम्मद अलफूज़ ख़ान, मोहम्मद एकराम ख़ान, अली उल्लाह खान, मोहम्मद शान ख़ान, मास्टर मोहम्मद तौसीफ़ एक़बाल ख़ान, मास्टर मोहम्मद ज़फ़र इक़बाल ख़ान, मोहम्मद हसनैन ख़ान, डाक्टर मोहम्मद शाहिद अनवर समेत काफी तादाद में लोग प्रोग्राम को कामयाब बनाने में मसरूफ थे।आए हुए मेहमानों की ज़्याफत में मास्टर मोहम्मद इरशाद आलम, मोहम्मद इमरान ख़ान, मोहम्मद राशिद इक़बाल, मोहम्मद फ़ैज़ रहमान और अमान ज़ख़ीरवी वग़ैरह मसरूफ़ ब अमल देखे गए।
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