रील बनाना दो युवकों को महंगा पड़ा,जान गंवानी पड़ी।

शहाबुद्दीन अहमद 
बेतिया, बिहार।
इन दिनों युवकों को रेलवे पटरी पर रील बनाने में व्यस्त रहनाअपनीअदाकारी समझ रहे हैं।इसी कारणवश उनकी जान भी चली जा रही है।रील बनाने के क्रम में कान में एयरफोन लगा रहता है, आंख मोबाइल पर टिका रहता है,अगल-बगल क्या हो रहा है,इसकी कोई जानकारी नहीं रहती है।इसी क्रम में, संवाददाता को पता चला है कि,नरकटिगंज मुजफ्फरपुर रेल खंड पर रील बनाने के चक्कर में दो युवकों नेअपनी जान गंवा दी।घटना सुबह के समय की बताई जा रही है। संवाददाता को विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुबहअमृतभारत ट्रेन मुजफ्फरपुर से नरकटियागंज की तरफ जा रही थी,इसी दौरान दोअज्ञात युवक मोबाइल से गुलाबनगर रेलवे ढाला एवं साठी स्टेशन के बीच पिलर संख्या 234/31 के पास रील बना रहे थे,इसी दौरान फौजी ट्रेन जो नरकटियागंज से मुजफ्फरपुर की तरफ जाने वालीआ गई, दो ट्रैक पर विपरीत दिशा से ट्रेनआता देख युवक घबरा गए,अमृत भारत ट्रेन की चपेट में आ गए। दोनो का शव क्षतविक्षतअवस्था में पाया गया।घटना की सूचना पर सैकड़ो की संख्या में महिला,पुरुष,बच्चे का जन सैलाब शव को देखने लिए उमड़ पड़ा।इसी बीच भीड़ का फायदा उठाकर परिजन शव लेकर भागे।इस संदर्भ में, साठी रेलवे स्टेशनअधीक्षक, संतोष कुमार ने संवाददाता को बताया कि घटना की सूचना मेमो के माध्यम से जीआरपी बेतिया को दे दी गई।मामले की छानबीन की जा रही है।घटना को लेकर बाजार में तरह-तरह के चर्चाएं हो रही हैं,वहीं रील बनाने के चक्कर में दो युवकों नेअपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। डिजिटल और आधुनिक युग की यह घटना नित्यदिन सुनने और देखने को मिल रही हैं,मगर शौक है कि मानता नहीं।रेलपटरी पर रील बनाना अपने जान को जानबूझकर,सोच समझ कर जोखिम में देना होता है,मगर फैशन के दौर में युवकों का क्या पूछना,जान चली जाए चली जाए,मगर रेल बनाना नहीं छूटेगा।

Comments

Popular posts from this blog

The Robotics and AI Innovation Lab was inaugurated at Carmel Girls' Inter College.

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

जो सिफत बाप में होती है कमोबेश वही सिफत औलाद में पाई जाती है - मुफ्ती अकरम