ग़ज़ा में मासूमों का कत्लेआम रोकने के लिए इज़राइल की धरती से आवाज़ उठाएं प्रधानमंत्री-मोहम्मद अरशद खान
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे पर एक विस्तृत और गंभीर मानवीय वक्तव्य जारी किया है। उन्होंने वैश्विक शांति और न्याय की दुहाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर हो रहा है, जब पूरी दुनिया ग़ज़ा में हो रही अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी की गवाह बन रही है। श्री खान ने प्रधानमंत्री से आह्वान किया कि वे भारत की महान परंपराओं और 140 करोड़ भारतीयों की नैतिक चेतना का सम्मान करते हुए इज़राइल में मानवता के पक्ष में अडिग स्टैंड लें।
सपा नेता मोहम्मद अरशद खान ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि आज जब ग़ज़ा में निर्दोष नागरिकों की मौत से पूरी दुनिया की अंतरात्मा झकझोर दी गई है, तब केवल कूटनीतिक औपचारिकताएं निभाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मलबे से निकलती मासूम बच्चों की लाशों और लाखों विस्थापित नागरिकों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 72,000 से अधिक लोगों की जान जाना महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह बर्बाद होते भविष्य और मानवता पर लगा गहरा घाव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह त्रासदी वैश्विक न्याय और सभ्य समाज के मूल सिद्धांतों की नींव को हिला रही है।
पूर्व विधायक ने भारत की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की धरती शांति, अहिंसा और न्याय का शाश्वत प्रतीक रही है। भारत हमेशा से उत्पीड़ितों और अन्याय के शिकार लोगों के साथ खड़ा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को इज़राइल की धरती से ही एक स्पष्ट और सिद्धांतपरक आवाज़ उठानी चाहिए, जिससे वहां हो रहे व्यवस्थित विनाश और मासूमों की हत्या को तत्काल रोकने की मांग की जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट का भी उल्लेख किया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने की वैश्विक आवश्यकता को दर्शाता है।
वक्तव्य के अंत में मोहम्मद अरशद खान ने कड़े शब्दों में कहा कि आज विश्व को हथियारों की नहीं बल्कि न्याय और नैतिक साहस की आवश्यकता है।उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि भारत को इस रक्तपात को रोकने और स्थायी शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।उन्होंने आगाह किया कि इतिहास केवल नेताओं के कार्यों को ही नहीं,बल्कि अन्याय के समय में उनकी चुप्पी को भी याद रखता है। अतः यह समय मानवता के लिए बोलने और ठोस कार्य करने का है।
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