अशफ़ाक हुसैन मेकरानी की बढ़ती सक्रियता ने प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के पी डी ए'(पिछड़ा, दलित,अल्पसंख्यक)मिशन को धार देने के लिए अब जमीन पर बड़े चेहरों ने मोर्चा संभाल लिया है।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की दूरदर्शी सोच और विकासपरक नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी का कुनबा लगातार बढ़ रहा है।इसी कड़ी में पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेहद करीबी व पुराने सहयोगी,पूर्वांचल के प्रभावशाली समाजसेवी अशफ़ाक हुसैन मेकरानी की बढ़ती सक्रियता ने प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।जब से अशफ़ाक मेकरानी ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में अखिलेश यादव के समक्ष समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है,तभी से वे पूर्वांचल में पार्टी के विस्तार और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुट गए हैं।अशफ़ाक मेकरानी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश को अखिलेश यादव जैसे युवा और प्रगतिशील सोच वाले नेता की अत्यंत आवश्यकता है,जो सर्वसमाज को साथ लेकर चलने का जज्बा रखते हैं।मेकरानी के अनुसार,अखिलेश यादव का पी डी ए' मॉडल केवल एक राजनैतिक नारा नहीं बल्कि समाज के वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों को मुख्यधारा में लाने का एक ठोस संकल्प है। उन्होंने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को एक बेहद मजबूत और अनुभवी जननेता बताते हुए कहा कि सिद्दीकी साहब के दशकों पुराने राजनैतिक अनुभव और अखिलेश यादव के आधुनिक विजन के मेल से समाजवादी पार्टी आगामी समय में एक अभेद्य शक्ति बनकर उभरेगी।सूत्रों के अनुसार,कई सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष रहे मेकरानी वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई प्रभावशाली समाजसेवियों और गैर-मजबूत राजनैतिक दलों के संपर्क में हैं।माना जा रहा है कि मेकरानी जल्द ही इन तमाम चेहरों की नसीमुद्दीन सिद्दीकी के माध्यम से अखिलेश यादव से मुलाकात करवाएंगे और उन्हें औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी में शामिल कराएंगे। पूर्वांचल की राजनीति में मेकरानी की गहरी पैठ और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें 'पी डी ए' मिशन के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप सकती है।मेकरानी की इस सक्रियता ने विपक्षी खेमों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि वे लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को सपा की नीतियों से जोड़कर संगठन को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
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