छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम को मिला नया नेतृत्व, समीयर राजूरकर बने पहले महापौर।
छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र।
छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम में दस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद महापौर और उपमहापौर का चुनाव संपन्न हुआ। शहर को नया नेतृत्व मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी के समीयर राजूरकर महापौर निर्वाचित हुए हैं, जबकि शिवसेना के राजेंद्र जंजाल उपमहापौर चुने गए हैं। शहर का नाम छत्रपति संभाजीनगर होने के बाद राजूरकर पहले महापौर बने हैं।
चुनाव में महायुति के दोनों उम्मीदवारों को 70-70 वोट मिले और उन्होंने 37 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं एमआईएम के महापौर पद के उम्मीदवार अशोक हिवराले और उपमहापौर पद के उम्मीदवार वसीम अहमद को 33-33 वोट प्राप्त हुए। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), वंचित बहुजन आघाड़ी और राष्ट्रवादी शरदचंद्र पवार गुट ने तटस्थ रहने का फैसला किया। कांग्रेस की एकमात्र पार्षद मालिका हबीब कुरैशी अनुपस्थित रहीं।
मंगलवार सुबह सभी पार्षद नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। बैठक की शुरुआत वंदे मातरम गीत से हुई। पीठासीन अधिकारी एवं जिलाधिकारी दिलीप स्वामी ने नामांकन पत्रों की जांच की और नाम वापस लेने के लिए समय देने के बाद हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई। कुल 103 पार्षदों ने मतदान किया, जबकि 11 पार्षद तटस्थ रहे। भाजपा के 57 और शिवसेना के 13 पार्षदों सहित कुल 70 पार्षदों ने राजूरकर के पक्ष में मतदान किया।
महापौर पद की शपथ लेने के बाद समीयर राजूरकर मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले। इस दौरान शहर के विकास कार्यों को लेकर चर्चा हुई। बैठक में मंत्री अतुल सावे, सांसद डॉ. भागवत कराड, विधायक संजय केनेकऱ, विधायक नारायण कुचे, शहर जिलाध्यक्ष किशोर शिटोले सहित भाजपा के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
इस बीच नगर आयुक्त श्रीकांत ने चेतावनी दी है कि जिन पार्षदों ने चुनाव खर्च का हिसाब प्रस्तुत नहीं किया है, वे जल्द रिपोर्ट जमा करें, अन्यथा उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। इससे कुछ पार्षदों में हलचल बढ़ गई है।
उपमहापौर राजेंद्र जंजाल की जीत पर उनके समर्थकों ने नगर निगम मुख्यालय के बाहर जमकर जश्न मनाया। ढोल-ताशों के साथ आतिशबाजी की गई और पोस्टर लगाए गए। "कमबैक", "जिसका गुरु मजबूत, उसका शिष्य पहलवान" और "बिग गेम मेड" जैसे पोस्टरों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही।
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