सात साल के सैयद ताहिब ने रखा पहला रोजा।

सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान में रोजा रखने व इबादत करने में छोटे बच्चे भी बड़ों से कम नहीं हैं। अल्लाह की रजा के लिए करीब 13 घंटे का भूखा प्यासा रहना नन्हें रोजेदारों के आत्मविश्वास को प्रदर्शित कर रहा है। कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है सूरजकुंड कॉलोनी के रहने वाले सैयद मतीन अहमद व नाजिया वारसी के सात वर्षीय बेटे सैयद  मोहम्मद ताहिब ने। उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा। वह यूकेजी के छात्र हैं। ताहिब ने अम्मी अब्बू के साथ सहरी खाई। दिनभर इबादत की। उनकी हौसला-अफजाई के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार पार्टी हुई। जिसमें दादा सैयद मारूफ अहमद, दादी सफिया वारसी, सैयद नदीम अहमद, ज्या वारसी, जीनत वारसी, जरीना, जैनब, अनाबिया, अजकिया, शाहिना आदि ने ताहिब को तोहफों व दुआओं से नवाजा। ताहिब ने अल्लाह का शुक्र अदा कर सबके साथ रोजा खोला और पूरी दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी।

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