नेक राह पर चलने का मौका देता है माह-ए-रमजान - मुफ्ती खालिद अय्यूब
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
अल कलम एसोसिएशन की ओर से मियां साहब इस्लामिया (एमएसआई) इंटर कॉलेज बक्शीपुर के सभागार में आमद-ए-रमजान सेमिनार व चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला का पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। मुख्य अतिथि राजस्थान से आए तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने चालीस हदीसों की स्पेशल वर्कशॉप के विजेताओं मुहम्मद साकिब, राशिदा जिया, फिजा खातून, आहू चश्म निजामी, अकलीमा वारसी, सोफिया फलक, शिफा खातून, फातिमा अंजुम, हुमा आफरीन, सना फातिमा, सानिया, मुहम्मद रुशान, मुहम्मद आसिफ, मुहम्मद उजैर, मुहम्मद सफियान को पुरस्कृत कर प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिया गया। संचालन कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी व हाफिज रहमत अली निजामी ने किया।
मुख्य अतिथि मुफ्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने अवाम को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां इंसानियत दम तोड़ती नजर आ रही है लोगों पर खुदगर्जी हावी होती जा रही है ऐसे में रमजान खुद की खामियों को दूर कर नेक राह पर चलने का मौका देता है। रमजान में चाहे दीन हो या फिर दुनिया दोनों संवरती है। रोजेदार अपनी आदतों की विपरीत अल्लाह के हुक्म का पूरी तरह पाबंद हो जाता है। समय पर सहरी और इफ्तार करता है। अल्लाह को राजी करने के लिए रोजे की हालत में भूख और प्यास बर्दाश्त करना मुसलमानों को सब्र सिखाता है। इंसान जब भूखा प्यासा होता है तो उसका नफ्स सुस्त और कमजोर होकर गुनाहों से बचा रहता है। उसे इबादत में लुत्फ आने लगता है। जब अल्लाह की बारगाह में इबादत कुबूल होती है तो बंदों की दुआ भी कुबूल होने लगती है। रोजे की हालत में अपने शरीर के हर हिस्से जैसे आंख, जुबान, कान और दिल की हिफाजत करता है। रमजान बंदों को अच्छाई का अभ्यास कराता है, ताकि ग्यारह माह भी इसी तरह गुजर जाए।
उन्होंने कहा कि रमजान की फजीलतों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है, मगर उसका बुनियादी सबक यह है कि हम सभी उस दर्द को समझें जिससे दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रोजाना दो-चार होता है। जब हमें खुद भूख लगती है तभी हमें गरीबों की भूख का एहसास हो सकता है। लिहाजा रमजान में खूब इबादत करें। कुरआन-ए-पाक की तिलावत करें। जकात व सदके की रकम हकदारों तक पहुंचा दें।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। अध्यक्षता मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने की। समारोह में शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, कॉलेज के प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, शहबाज सिद्दीकी, हाफिज नजरे आलम कादरी, कारी सरफुद्दीन कादरी, नवेद आलम, मुहम्मद आजम, मोहम्मद सिद्दीक, कामिल खां, सैयद नदीम अहमद, सैयद जफर हसन, मोहम्मद जाबिर, रिजवानुल्लाह, ज्या वारसी, आस्मा खातून अयाशा फसीही, मुफ्तिया शहाना खातून, शीराज सिद्दीकी, जलालुद्दीन, अली गजनफर शाह, मुहम्मद शुएब, हाजी फैज खान, अलाउद्दीन निजामी, ताबिश सिद्दीकी, सैयद मतीन अहमद, एडवोकेट मोहम्मद आजम, एडवोकेट मोहम्मद राफे, एडवोकेट आसिम, गुलाम मोहम्मद, प्रिंस, जीशान, महबूब आलम, मौलाना महमूद रजा, कासिद इस्माइली, अली अहमद, महबूब अहमद, बेलाल अहमद, आतिफ, खुर्शीद अहमद मून, हाजी उबैद अहमद, गुलाम जीलानी, सैयद शहाबुद्दीन, जव्वाद अली सब्जपोश, एडवोकेट कासिफ महमूद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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