रोजेदारों ने पूरी दुनिया के लिए मांगी अमन ओ अमान की दुआ।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान का रोजा अल्लाह व रसूल की याद में बीता। रोजेदारों ने इबादतों के जरिए अल्लाह को राजी करने की कोशिश की। अल्लाह की खास रहमत बंदों पर उतर रही है। रोजेदारों में गजब का उत्साह है। रोजेदारों ने पूरी दुनिया में अमन ओ अमान, अपने व अपने परिवार के लिए, गरीबों, यतीमों, पीड़ित लाचार, बेसहारा लोगों के लिए दुआ मांगी। रोजेदारों ने नमाज पढ़कर, कुरआन की तिलावत कर, दुरूद ओ सलाम पेश कर, तस्बीह फेर, सदका खैरात कर नेकियां बटोरीं। इफ्तार-सहरी की रौनक बरकरार है। मस्जिद की सफें भरी नजर आ रही हैं। तरावीह की नमाज जारी है। मस्जिद व घरों में रौनक है। कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर रोजेदार नेकियां कमा रहे हैं। मालिके निसाब जकात व सदका-ए-फित्र अदा कर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे है। मस्जिदों में रात की तरावीह नमाज के अलावा पांच वक्त की फर्ज नमाजों में खूब भीड़ हो रही है। सर पर टोपी रखे रोजेदार बच्चे व नौजवान हर जगह दिख रहे हैं। बच्चे भी खूब इबादत कर रहे हैं। बाजार भी गुलजार है।
इस्लाम में जकात फर्ज है जल्द अदा करें : मुफ्ती शुएब
मुफ्ती मुहम्मद शुएब रज़ा निजामी ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम में जकात फर्ज है। जकात पर मोहताज, गरीबों, यतीमों, बेवाओं का हक है जो मालिके निसाब न हों। इसे जल्द से जल्द हकदारों मुसलमानों तक पहुंचा दें ताकि वह रमजान व ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। अगर आप मालिके निसाब हैं तो हकदार को जकात जरूर दें, क्योंकि जकात न देने पर सख्त अजाब का बयान कुरआन-ए-पाक में आया है। जकात हलाल और जायज तरीके से कमाए हुए माल में से दी जाए।
रमजान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय : मो. नदीम
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मोहम्मद नदीम ने बताया कि रमजान में हर आदमी अपनी रूह को पवित्र करने के साथ अपनी दुनियादारी की हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में समर्पित हो जाता है। अमूमन साल में ग्यारह महीने तक इंसान दुनियादारी के झंझावतों में फंसा रहता है लिहाजा अल्लाह ने रमज़ान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय किया है। शाहनवाज अहमद ने कहा कि रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना नहीं है बल्कि रोजे की रूह दरअसल आत्म संयम, नियंत्रण, अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने के संकल्प और उस पर मुस्तैदी से अमल में बसती है।
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