रमजान के पहले जुमा की नमाज अदा, मांगी अमन ओ अमान की दुआ।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में अदा की गई। मुल्क में अमन ओ अमान, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी गई। फर्ज नमाजों के साथ नफ्ल नमाज पढ़ी गई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। माह-ए-रमजान का पहला जुमा व दूसरा रोजा अल्लाह को राजी करने में गुजरा।
मदीना जामा मस्जिद रेती चौक, जामा मस्जिद उर्दू बाजार, जामा मस्जिद रसूलपुर, गोरखनाथ जामा मस्जिद, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद जामा मस्जिद नार्मल, मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार सहित सभी मस्जिदों में भीड़ उमड़ी।
जुमा के नमाज की तैयारी सुबह से शुरु हो गई। लोगों ने गुस्ल किया। साफ सुथरे कपड़े पहने। इत्र लगाया। सर पर टोपी सजाई। अजान होने से पहले ही बच्चे, नौजवान व बुजुर्गों ने मस्जिदों की ओर कदम बढ़ाए, ताकि पहली पंक्ति में जगह मिल जाए। अजान से पहले नमाजियों से मस्जिदें भरनी शुरु हो गई। अजान होने तक मस्जिदें नमाजियों से भर गई। इसके बाद नमाजियों ने सुन्नत नमाज अदा की। तकरीर के बाद मस्जिदों के इमाम ने मिम्बर पर खड़े होकर खुत्बा पेश किया। जुमा की नमाज अदा की गई। इमाम के साथ सभी ने अल्लाह की बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए। इमाम की दुआ पर सभी ने आमीन की सदा बुलंद की। मिलकर दुरूद ओ सलाम पढ़ा गया। घरों में महिलाओं ने नमाज अदा की। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की।
शाम को इफ्तार की तैयारी शुरु हो गई। लजीज व्यंजन से दस्तरख्वान सज गए। शाम को असर की नमाज पढ़ी गई । इफ्तार का इंतजार शुरु हुआ। इफ्तार का समय होने पर सबने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोजा खोला। रोजा खोलने के बाद मस्जिदों का रुख किया। मगरिब की नमाज अदा की। फिर थोड़ा चाय नाश्ता किया। इसके बाद इशा व तरावीह की नमाज अदा की। हफ्ते की ईद व दूसरा रोजा मुसलमानों ने अल्लाह की रजा में गुजारा। बाजारों व मुस्लिम मोहल्लों में देर रात तक रौनक बनी रही।
उलमा किराम ने जुमा की तकरीर में रोजे के विशेषता बताई।
जुमा की तकरीर में मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि रोजेदार खुशनसीब है जिसके लिए हर रोज जन्नत सजाई जाती है। रोजेदार की मगफिरत के लिए दरिया की मछलियां दुआ करती हैं। रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि नफ्स पर नियंत्रण का जरिया है। असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। जब हाथ उठे तो भलाई के लिए। कान सुने तो अच्छी बातें। कदम बढ़े तो नेक काम करने के लिए। आंख देखे तो जायज चीजों को। रमजान का अदब व एहतराम बेहद जरूरी है।
नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना मोहम्मद असलम रजवी ने कहा कि रोजा सिर्फ खाने और पीने से दूर रहने का नाम नहीं, रोजा तो यह है कि बेहूदा बातों से बचा रहे। झूट, चुगली, गीबत, गाली देने व किसी को तकलीफ देने से बचें। यह चीजें वैसे भी नाजायज व हराम हैं।
गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने अल्लाह की इनायतों, रहमतों और बख्शिश का जिक्र किया।
शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह के इमाम हाफिज आफताब आलम ने कहा कि रमजान का महीना इबादत का महीना है। मतलब इस महीने में ज्यादा से ज्यादा ऐसा काम किया जाए, जिससे अल्लाह व रसूल खुश हों और अल्लाह व रसूल को खुश करने के लिए सबसे जरूरी है उनके बताए रास्ते पर चलना। ज्यादा से ज्यादा अल्लाह को याद करें। नमाज और कुरआन पढ़ें क्योंकि इस महीने में जो इबादत की जाती है, आम दिनों के मुकाबले ज्यादा सवाब देती है। एक दूसरे की मदद करें, जकात और फित्रा अदा करें। गरीबों को ज्यादा से ज्यादा सदका व खैरात दें। रोजेदारों को इफ्तार कराएं।
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