अल्लाह को महबूब है माह-ए-रमजान।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
रोजेदार बंदों ने आज का दिन अल्लाह की रजा में गुजारा। भूख प्यास के बीच रोजेदार अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे हैं। खुशनसीब मुसलमान एक साथ तीन फर्ज अदा कर रहे हैं, नमाज भी पढ़ रहे हैं, रोजा भी रख रहे हैं और जो मालिके निसाब हैं वह जकात भी अदा कर रहे हैं। मस्जिदों व दरगाहों पर सामूहिक रूप से इफ्तार हो रही है। माह-ए-रमजान का तीसरा रोजा भी अल्लाह की इबादत में बीता। चारों तरफ रमजान का नूर छाया हुआ है। अल्लाह के बंदे दिन में रोजा रखकर व रात में तरावीह की नमाज अदा कर अल्लाह को राजी करने में लगे हुए हैं। कुरआन-ए-पाक की तिलावत जारी है। नफ्ल नमाजें सलातुल तस्बीह, चाश्त, तहज्जुद, इशराक, सलातुल अव्वाबीन आदि पढ़ी जा रही है। नबी व आले नबी पर दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया जा रहा है। मस्जिदों की सफें नौजवानों, बुजुर्गों व बच्चों से भरी नजर आ रही हैं। घरों में महिलाएं इबादत के साथ किचन व बाजार से खरीदारी की जिम्मेदारियां उठा रही हैं। बाजारों में चहल पहल है। हर तरफ रमजान का फैजान जारी है।
हजरत सैयदा फातिमा जहरा रदियल्लाहु अन्हा का उर्स-ए-पाक मनाया गया। आपकी पाकीजा जिंदगी पर रोशनी डाली गई। फातिहा ख्वानी हुई। मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी, हजरत अली की बीवी हजरत सैयदा फातिमा जहरा रदियल्लाहु अन्हा का विसाल (निधन) 3 रमजान को हुआ था। आपकी जिंदगी हम सभी खासकर औरतों के लिए ऐसी नजीर है, जिस पर अमल करते हुए अपनी जिंदगी को खूबसूरत बनाया जा सकता है। हजरत फातिमा ने अपनी पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत में गुजार दी। वालिद, शौहर, बेटों के साथ उनका जो सुलूक रहा, वह आज भी एक नमूना-ए-हयात बना हुआ है। आपने जिस तरह जिंदगी गुजारी, बच्चों की परवरिश, पड़ोसियों का ख्याल रखा वह एक मिसाल है।
शिक्षक मोहम्मद आजम ने बताया कि रोजे से गफलत दूर होती है इसलिए बंदा अल्लाह का करीबी हो जाता है। हदीस शरीफ में है कि रमजान और कुरआन रोजेदार की शफाअत करेंगे। अल्लाह तआला ने फरमाया कि बंदा रोजा मेरे लिए रखता है और उसकी जजा मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से छोड़ता है। रोजेदार के लिए दो खुशियां हैं एक इफ्तार के वक्त और एक अल्लाह से मिलने के वक्त। रोजा रखने से बंदा अल्लाह का करीबी बन जाता है। सहरी करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है लिहाजा सहरी जरूर करें।
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