रमजान हेल्पलाइन नंबर जारी, घर बैठे मिलेगा दीनी सवालों का शरई जवाब।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान को लेकर सुन्नी दारुल कजा वल इफ्ता तुर्कमानपुर ने हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521 जारी किया है। उक्त मोबाइल नंबर पर नमाज, रोजा, सदका, जकात, फित्रा, एतिकाफ, शबे कद्र सहित तमाम दीनी सवालों का शरई जवाब हासिल किया जा सकता है। यह जानकारी शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने दी है। उन्होंने बताया कि रोजेदार सुबह दस से दोपहर 12:30 बजे तक, दोपहर तीन से शाम 5:30 बजे तक और रात साढ़े दस से रात 12:00 बजे तक ही कॉल कर सकते हैं। व्हाट्सएप पर मैसेज के जरिए भी दीनी सवाल पूछा जा सकता है। मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी के मोबाइल नंबर 9956971232 और कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी के मोबाइल नंबर 7860799059 पर भी रोजा, नमाज, जकात, फित्रा आदि से संबंधित दीनी सवाल घर बैठे पूछा जा सकता है। उलमा किराम शरीअत की रौशनी में जवाब देंगे।
इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती मुहम्मद शुएब रजा निजामी ने बताया कि इस्लाम धर्म के सबसे पाक माह रमजान की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमजान शरीफ का महीना दीन-ए-इस्लाम में खास अहमियत रखता है। इस माह में इस्लाम धर्म के मानने वाले पूरा महीना रोजा रखते हैं। अल्लाह की इबादत करते हैं। इस पाक महीने मे रोजा रखने वाले रोजेदार सुबह सादिक से पहले तक सहरी करके रोजे की नीयत करके रोजा रखने की शुरुआत करते हैं। शाम को सूरज छिपने के बाद इफ्तार करते हैं। रोजा न रखना बहुत बड़ा गुनाह है।
इस्लाम के पांच रुक्न मे से रोजा भी एक अहम रुक्न है : नौशीन फातिमा
इस्लामी मामलों की जानकार नौशीन फातिमा ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम के पांच रुक्न (हिस्सों) मे से रोजा भी एक अहम रुक्न (हिस्सा) है। रमजान शरीफ में अल्लाह ने बंदों की रहनुमाई के लिए अपनी पाक किताब कुरआन शरीफ उतारी। इस माह कसरत से जकात, सदका व फित्रा निकालना चाहिए ताकि गरीब, यतीम, बेसहारा, बेवा सभी रमजान शरीफ व ईद की खुशियों में शामिल हों सकें। अगर किसी शख्स ने एक रोजेदार को इफ्तार कराया तो उस शख्स को भी उस रोजेदार के बराबर सवाब मिलेगा। भले ही उसने एक घूंट पानी से ही रोजेदार का रोजा खुलवाया हो। रोजेदार के लिए दरिया की मछलियां दुआ करती हैं। रोजेदार के मुंह की बू अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद हैं। रोजेदार जन्नत में एक खास दरवाजे से दाखिल होगा।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि इस्लाम धर्म में माह-ए-रमजान बेहद खास है। हर बालिग मुसलमान मर्द व औरत जो अक्ल वाला व तंदुरुस्त हो उस पर रमजान का रोजा रखना फर्ज है। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। रोजा न रखने पर वह शख्स अल्लाह की नाफरमानी करता है। रमजान बहुत ही रहमत व बरकत वाला महीना है। अल्लाह के बंदे दिन में रोजा रखते है और रात में खास नमाज तरावीह पढ़ते है। इस माह में मुसलमान कसरत से जकात, सदका, फित्रा निकाल कर गरीब, यतीम, बेसहारा, बेवाओं की मदद करते हैं। रोजे की हालात में व आम दिनों में भी किसी की बुराई करने व सुनने, बुरा देखने, बुरा करने से बचना चाहिए।
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