दीन के रखवालों की सुरक्षा अब इख़्तियारी नहीं, यह क़ौमी फ़र्ज़ है - सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी
जयपुर, राजस्थान।
ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने देश के मौजूदा संवेदनशील हालात और बदलते सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संदेश जारी किया है। यह संदेश विशेष रूप से रमज़ानुल मुबारक और अन्य दीनि मौक़ों पर सफ़र करने वाले हाफ़िज़-ए-क़ुरआन, उलेमा-ए-किराम, मशायख़-ए-इज़ाम और इमाम-ए-मसाजिद की सुरक्षा से संबंधित है।
अपने बयान में सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने कहा:
“दीन की ख़िदमत अंजाम देने वाले लोग सिर्फ़ व्यक्ति नहीं, बल्कि मिल्लत की अमानत और समाज के नैतिक स्तंभ हैं। उनकी हिफ़ाज़त दरअसल क़ौम की हिफ़ाज़त है। मौजूदा दौर में जज़्बात से ज़्यादा हिकमत और जोश से ज़्यादा शऊर की ज़रूरत है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के विभिन्न हिस्सों में दीनी सेवाओं के लिए जाने वाले तमाम उलेमा व हाफ़िज़ हज़रात, एहतियात को अपनी प्राथमिकता बनाएं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गैर-ज़रूरी बहस, उकसाने वाली बातचीत और सियासी या फ़िरक़ावाराना मुद्दों से पूरी तरह दूरी रखी जाए।
सफ़र से पहले मुक़ाम-ए-क़याम और आयोजकों की तस्दीक़ की जाए, पहचान पत्र और ज़रूरी संपर्क नंबर साथ रखे जाएं, सोशल मीडिया पर लोकेशन या संवेदनशील जानकारी साझा न की जाए, और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत स्थानीय ज़िम्मेदार लोगों व प्रशासन को सूचना दी जाए।
सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने कहा कि शरीअत-ए-मुतह्हरा ने जान व माल की हिफ़ाज़त को बुनियादी मक़ासिद में शामिल किया है। इसलिए एहतियात इख़्तियार करना कमज़ोरी नहीं बल्कि शरीअती ज़िम्मेदारी और दूरअंदेश क़ियादत की पहचान है।
उन्होंने देश भर की मसाजिद, मदरसों और दीनि इदारों से अपील की कि वे अपने संबंधित लोगों में सुरक्षा जागरूकता पैदा करें और अनुशासन को मज़बूत बनाएं।
अपने संदेश के अंत में सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने कहा:
“हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दीन की शमा भी जलाए रखें और उसकी हिफ़ाज़त भी यक़ीनी बनाएं। वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत समझदारी, एकता और एहतियात है।”
अंत मेंउन्होंने दुआ की कि *अल्लाह तआला तमाम हाफ़िज़-ए-क़ुरआन, उलेमा-ए-किराम, मशायख़ और इमामों को अपनी हिफ़ाज़त में रखे और उनकी ख़िदमात को क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।
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