रेहान-ए-मिल्लत ने अपनी पूरी जिंदगी मज़हब-ओ-मसलक की खिदमत में गुजारी- कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी
बरेली, उत्तर प्रदेश।
आज मरकज़-ए-अहले सुन्नत बरेली शरीफ में आला हज़रत फ़ाज़िले बरेलवी के पोते मुफ़्ती रेहान रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह (रहमानी मिया) का 41 वा एक रोज़ा उर्स-ए-रहमानी दरगाह परिसर में मनाया गया। शाम को सामूहिक रोज़ा इफ़्तार में दूर दराज़ के हज़ारों अक़ीदमंदो ने दरगाह प्रमुख व सज्जादानशीन के साथ एक ही दस्तरखान पर इफ्तार किया। उर्स के सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती व सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन मियां की सदारत व सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में सम्पन्न हुए।
दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स की शुरआत बाद नमाज़-ए-फ़ज़्र कुरानख्वानी से हुई। सुबह 8 बजे महफ़िल का आगाज़ तिलावत-ए कुरान से हुआ। नातख़्वा हाजी गुलाम सुब्हानी ने हम्द,नात व मनकबत का नज़राना पेश किया। इसके बाद *दरगाह सरपरस्त हज़रत सुब्हानी मियां की सदारत में उलेमा की तक़रीर का सिलसिला शुरू हुआ। कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने अपने खिताब में रेहाने मिल्लत की जिन्दगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि सुन्नियत व मसलक-ए-आला हज़रत की खिदमत में आपने अपनी पूरी जिंदगी गुज़ार दी। दुनिया भर में रज़ा का परचम लहराने वाली शख्सियत का नाम रेहान ए मिल्लत है। उस दौर में मुसलमानो को जब भी मज़हबी,रूहानी,खानकाही,सियासी ज़रूरत पेश आई आपने उनकी कयादत फरमाई। आप उर्दू जुबान के साथ अरबी व इंग्लिश के माहिर होने के सवब आपने एशिया के अलावा यूरोप,अफ्रीका,अमेरिका आदि के मुल्कों का दौरा कर मजहब व मसलक को फरोग देने के लिए काम किया। आप बड़े आलिम,मुफ्ती और बेहतरीन शायर भी थे। आपने मुल्क में अल्पसंख्यको के अधिकारों के लिए अपनी आवाज़ हमेशा बुलंद की।* सुबह 9.58 मिनट पर मुफ्ती अय्यूब नूरी व कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने फ़ातिहा पढ़ी। मुल्क-ए-हिंदुस्तान में अमन-ओ-सुकून और खुशहाली के लिए खुसूसी दुआ मंजर-ए-इस्लाम के सदर मुफ्ती आकिल रज़वी ने की। दिन भर गुलपोशी व चादरपोशी का सिलसिला चलता रहा।
इस मौके पर मुफ्ती सय्यद शाकिर अली,मुफ्ती मोइनउद्दीन बरकाती,मुफ्ती जमील नूरी,मुफ्ती ज़ईम रज़ा,मौलाना अबरार उल हक़,मास्टर कमाल,अनवारूल सादात,राशिद अली खान,कासिम कश्मीरी,हाजी अब्बास नूरी,हाजी जावेद खान,परवेज नूरी,तारिक सईद,शाहिद नूरी,अजमल नूरी,परवेज़ नूरी, औरंगज़ेब नूरी,ताहिर अल्वी,मंज़ूर रज़ा,नाजिम रज़ा,मुजाहिद रज़ा,शरिक बरकाती, ज़ुएब रज़ा,शरिक उल्लाह खान,साजिद नूरी,नईम नूरी,मुस्तकीम नूरी,आसिम नूरी,आलेनबी,इशरत नूरी, सय्यद माजिद,सय्यद एजाज़,युनुस गद्दी,इरशाद रज़ा,अब्दुल माजिद,आरिफ रज़ा,अजमल रज़ा,समी रज़ा,सुहैल रज़ा,शाद रज़ा,अरवाज़ रज़ा,शोएब रज़ा,साकिब रज़ा,जीशान कुरैशी,अयान रज़ा,आदि लोग मौजूद रहे।
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