कुर्बानी से बढ़ती है मुहब्बत व भाईचारगी - अनस नक्शबंदी

ईद-उल-अजहा त्योहार 27 या 28 मई को। 
सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में कुर्बानी की विशेषताओं को लेकर खास दीनी संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत मुहम्मद शाद ने की। नात-ए-पाक हाफिज रहमत अली निजामी ने पेश की। 
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि अल्लाह के नाम पर कुर्बानी देने का त्योहार ईद-उल-अजहा 27 या 28 मई को परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। इस्लाम धर्म में कुर्बानी देना वाजिब है। पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का कुरआन व हदीस से साबित सच्चा वाकया ईद-उल-अजहा त्योहार की बुनियाद है। ईद-उल-अजहा त्योहार शांति व उल्लास के साथ मनाएं। कुर्बानी जिलहिज्जा की 10, 11, और 12 तारीख को अल्लाह की रजा के लिए खास जानवर जबह करने का नाम है। कुर्बानी हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर वाजिब है। इसका मकसद तकवा और अल्लाह का कुर्ब हासिल करना है। यह इबादत गुनाहों की माफी और जहन्नम की आग से हिफाजत का जरिया है। 
उन्होंने कुर्बानी के मसाइल बताते हुए कहा कि कुर्बानी वाजिब होने की शर्तें हैं जैसे मुसलमान होना, बालिग, आकिल, मुकीम (मुसाफिर न हो) और साहिबे-निसाब होना। कुर्बानी जिलहिज्जा की 10 तारीख से लेकर 12 तारीख को सूर्यास्त तक की जा सकती है। सबसे अफजल दिन 10 जिलहिज्जा है। कुर्बानी के इस त्योहार में मुहब्बत व भाईचारा बढ़ता है। कुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीब, फकीर मुसलमानों में जरूर बांटा जाए। साफ-सफाई अल्लाह तआला को पसंद हैं इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। कुर्बानी की फोटो व वीडियो न बनाएं और न ही अपने कुर्बानी के जानवर की नुमाइश करें। कुर्बानीगाह के पास पर्दा वगैरह का इंतजाम करें।‌ जानवरों के अवशेष सड़कों पर न फेंकें। प्रशासन व नगर निगम का सहयोग करें। यह मेहमाननवाजी व जरूरतमंदों की मदद करने का त्योहार है। भाईचारे व मुहब्बत को आम करने की शिक्षा देती है कुर्बानी।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर शीरीनी बांटी गई। संगोष्ठी में नेहाल अहमद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, अली अफसर, हाजी रफीउल्लाह, हाजी बदरुल हसन, जावेद, आकिब, जीशान, आसिफ सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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