महाबोधि महाबिहार को पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 500वें दिन पहुंचा।
गया, बिहार।
विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार समाप्त कर महाबिहार को पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 500वें दिन में पहुंच गया। विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़े बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को समाप्त करने और महाबिहार का पूरा नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आज 500वें दिन में पहुंच गया।इस मौके पर देश-विदेश से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने एक दिन की भूख हड़ताल की। आंदोलनकारी ने अपनी मांगों को फिर दोहराया। प्रशासन की रोक और धरना स्थल से हटाए जाने के बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। बीटीएमसी गोलंबर पर आयोजित एकदिवसीय भूख हड़ताल में कई राज्यों से आए बौद्ध भिक्षु अनुयायी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आंदोलनकारी ने कहा कि यह केवल बोधगया का मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के बौद्ध समाज की आस्था और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। इसी कारण कई देशों में भी प्रतीकात्मक भूख हड़ताल आयोजित की गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने कहा कि जैसे मंदिरों का संचालन हिंदू समाज, मस्जिदों का संचालन मुस्लिम समाज और चर्च का संचालन ईसाई समुदाय करता है, इस तरह महाबोधि महाविहार का संचालन भी पूरी तरह बौद्ध समाज के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया की बीटी एक्ट 1949 के तहत बनी प्रबंधन समिति में बौद्ध समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था बौद्ध समुदाय की भावनाओं के अनुरूप नहीं है। आंदोलनकारी ने बीटी एक्ट 1949 को असंवैधानिक बताया। उन्होंने इस कानून को तुरंत खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महाबिहार के प्रशासन और प्रबंधन का पूरा अधिकार बौद्ध समाज को सौपा जाना चाहिए ।आकाश लामा ने बताया कि इस मामले को लेकर वर्ष 2012 में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया था। उन्होंने कहा कि अब तक इस मामले का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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