पुलिस प्रशासन के कड़ी चौकसी के बीच मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण,सौहार्डपूर्ण माहौल में हुई संपन्न।
बेतिया, बिहार।
इस्लामिक कैलेंडर के पहला महीना मोहर्रम का इस्लाम धर्म में विशेषआध्यात्मिक ऐतिहासिक महत्व है।यह महीना पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम द्वारा मक्का से मदीना प्रवास की याद दिलाती है,इसकी दसवीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की स्मृति शोक,त्याग,बलिदान के रूप में मनाया जाता है। कर्बला का इतिहास में दसवीं मोहर्रम आशूरा को 680 ईस्वी में इराक के कर्बला के मैदान में पैगंबर मोहम्मद के नाती हजरत इमाम हसन,हुसैन और यजीद के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इन लोगों नेअत्याचार केआगे सर झुकाने के बदले,सर को कटाना,सत्य,न्याय के लिएअपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। इसी महीने के शुरुआती दिनों में मुसलमान विशेष कर शिया समुदाय के लोग शोक सभाएं करते हैं,जिन्हें मजलिस कहा जाता है,यह लोग नोहा करते हैं,कलेजा पीटते हैं। इमाम हुसैन की शहादत के प्रतिक के रूप में सुंदर औरआकर्षक ताजिए,दुलदुल,शिपड और झंडा निकलते हैं।इस महीने के नवमी और दसवीं को मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा,नमाज,इबादत,गरीबों को खाना खिलाते हैं।जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन की कड़ी चौकसी के बीच किसी प्रकार का कोईअप्रिय घटना नहीं हुई। पुलिस प्रशासन चुस्तदुरुस्त दिखी। सभी संवेदनशील,संदेहासमक, अतिसंवेदनशील स्थान,पूजा स्थलों पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी,पुलिस का गस्ती दल 24 घंटा गस्त कर रहा था।
मुस्लिम समुदाय के युवक, किशोर,बच्चेअपने-अपने मोहल्ले के चौक चौराहा पर अखाड़ा,गतकापुड़ी,लाठी, तलवार भांजने का कर्तव्य दिखाये,मातमी जुलूस, ताजिया निकाले।
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