लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार।
फर्जी कंपनियां बनाकर कॉरपोरेट खातों से होती थी करोड़ों की साइबर ठगी, 718 शिकायतों से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज
ब्यूरो चीफ फुरकान कुरैशी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
राजधानी में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए सुशांत गोल्फ सिटी थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट फ्रॉड रैकेट से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम से करंट बैंक खाते खुलवाते थे और उन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन कर कमीशन कमाते थे। गिरोह के खिलाफ देशभर में एनसीआरपी पोर्टल पर 718 शिकायतें दर्ज मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है पुलिस के मुताबिक 28 जून को सूचना मिली थी कि आवास विकास योजना स्थित एक फ्लैट में कुछ लोग साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय लेनदेन कर रहे हैं। सूचना पर छापेमारी की गई तो चार युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजैक्शन करते मिले। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर फर्जी फर्म और कंपनियां रजिस्टर कराते थे। इसके बाद उन्हीं कंपनियों के नाम से करंट खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम उनमें ट्रांसफर कराई जाती थी और बाद में रकम निकालकर गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचाई जाती थी। गिरफ्तार आरोपियों में उन्नाव निवासी सत्येंद्र सविता तथा बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी निप्पु कुमार, मनीष कुमार और सन्नी कुमार शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 79 चेकबुक, 77 एटीएम कार्ड, 29 सिम कार्ड, 15 एंड्रॉयड मोबाइल, 14 कीपैड मोबाइल, तीन लैपटॉप, छह पीओएस मशीनें, विभिन्न कंपनियों के दस्तावेज, आईकार्ड, स्टांप और अन्य उपकरण बरामद किए हैं प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह कॉरपोरेट बैंक खातों का इस्तेमाल इसलिए करता था ताकि बड़ी रकम का लेनदेन आसानी से हो सके और संदेह की संभावना कम रहे। खातों का संचालन इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पीओएस मशीनों के जरिए किया जाता था। ठगी की रकम कई चरणों में अलग-अलग खातों और माध्यमों से आगे भेजकर उसका स्रोत छिपाया जाता था, जबकि आरोपी इसके बदले तय कमीशन लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। मामले में फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों, बैंक खातों और अन्य राज्यों में दर्ज शिकायतों की भी गहन जांच कर रही है।
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