अर्जक संघ ने कराया अंतरजातीय शादी।

उपेन्द्र पथिक ने वर वधु को कराया विवाह का शपथ
विनोद विरोधी 
गया, बिहार। 
गया जिला के वजीरगंज प्रखंड स्थित ओरैल  निवासी सीताराम प्रसाद और रामप्यारी देवी के बड़े  पुत्र राहुल कुमार की शादी बीती रात्रि गयाजी के घुघरीटांड स्थित एक  मैरेज हॉल में शेरघाटी के नवादा निवासी विजय सिंह और नीलम देवी की पुत्री रिंकी कुमारी के साथ अर्जक पद्धति से सम्पन्न हुई। वर-वधु को विवाह का प्रतिज्ञापन अर्जक संघ सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र पथिक ने कराया। विवाहोपरांत वर वधु को विवाह प्रतिज्ञापन की एक एक प्रति दोनों वर वधु को दिया गया। जिसमें वर वधु के अलावा विवाह प्रतिज्ञापन कराने वाले और दोनों पक्ष के दो दो गवाह का भी हस्ताक्षर कराया गया था।
वजीरगंज के पत्रकार रवि भूषण सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में वर-वधु ने सत्यनिष्ठा के साथ पति-पत्नी के रूप में रहने , समता का व्यवहार और आचरण करने, वैवाहिक जीवन को मधुर और अविच्छिन्न बनाने तथा मानव-मानव की बराबरी वाले समाज के विकास व समृद्धि में योगदान देने का प्रतिज्ञा की। वहां उपस्थित सभी लोगों ने फूलों की वर्षा करके वर वधु को मंगलकामना दी।
शादी समारोह में उपस्थित रजनीकांत रवि, जितेंद्र कुमार, अविनाश कुमार, बिन्देश्वर कुमार, प्रभाकर कुमार समेत वर-वधु पक्ष के दर्जनों लोगों ने वर-वधु के सुखमय जीवन की मंगलकामना की। इस अवसर पर अर्जक गायिका  सविता कुमारी ने अपने गीत के माध्यम शादी की अवैज्ञानिक पुरानी रीति-रिवाज को नकार कर मानववादी रीति-रिवाज अपनाने पर बल दिया। जबकि प्रसिद्ध जादूगर बबन सिंह कुशवाहा ने जादू दिखाकर समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों को मिटाकर वैज्ञानिक सोच पैदा करने पर बल दिया।
स्मरणीय है कि वर राहुल कुमार पिछड़ी जाति के कुशवाहा समाज के हैं जबकि वधु रिंकी कुमारी अति पिछड़े समाज अंतर्गत दांगी जाति की है। दोनों की शादी वर-वधु के माता-पिता की मर्जी से हुई। इस अंतरजातीय शादी की सबो ने सराहना की। विवाह का प्रतिज्ञापन कराने वाले वरिष्ठ अर्जक नेता उपेन्द्र पथिक ने बताया कि अर्जक संघ विज्ञान और संविधान पर आधारित मानववादी संगठन है। इस पद्धति की विशेषता कम खर्च, कम समय और कम परेशानी है। फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर सबों को शिक्षित करने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर दिया जाता है।इसमें स्त्री पुरुष और समाज में  समानता लाने की शपथ दिलाई जाती है।  इस कारण समाज के पिछड़े दलित वर्ग में यह पद्धति काफी लोकप्रिय हो गया है।

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