शहीदाने कर्बला की याद में गौसे आज़म फाउंडेशन द्वारा सामूहिक रोज़ा इफ्तार का आयोजन।

सेराज अहमद कुरैशी 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
शहीदाने कर्बला, हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों की अज़ीम कुर्बानियों की याद में गौसे आज़म फाउंडेशन (GAF) गोरखपुर शाखा की ओर से नौवीं मुहर्रम के अवसर पर सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद, रहमतनगर, गोरखपुर में सामूहिक रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, उलेमा-ए-किराम, समाजसेवियों एवं बड़ी संख्या में रोज़ेदारों ने सहभागिता कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
इस अवसर पर गौसे आज़म फाउंडेशन गोरखपुर शाखा के जिला अध्यक्ष समीर अली ने अपने संबोधन में कहा कि "हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी पूरी इंसानियत के लिए एक मिसाल है। कर्बला हमें सिखाती है कि सत्य और न्याय के लिए हर परिस्थिति में डटे रहना चाहिए। गौसे आज़म फाउंडेशन का उद्देश्य समाज में प्रेम, भाईचारा, मानव सेवा और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देना है। नौवीं मुहर्रम पर आयोजित यह सामूहिक रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम कर्बला के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक विनम्र प्रयास है।"
इफ्तार में कर्बला के शहीदों की याद में विशेष दुआ का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कर्बला का संदेश इंसानियत, सब्र, त्याग, सत्य और न्याय की रक्षा का संदेश है, जो आज भी पूरी मानवता को राह दिखाता है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से इमाम अली अहमद शाद बस्तवी साहब, रहमतनगर अध्यक्ष मोहम्मद फैज़, इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार सेराज अहमद कुरैशी, मोहम्मद जैद, अहसन खान, रियाज़ अहमद, अमान अहमद, सैय्यद शहाबुद्दीन, जुनेद खान तथा मोहम्मद इस्तियाक, मोहम्मद जिशान, मोहम्मद अर्श सहित अनेक सम्मानित लोगों ने उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाया। सभी ने मिलकर शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज में अमन, भाईचारे और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।
इफ्तार में रोज़ेदारों के लिए खजूर, फल, शर्बत एवं अन्य खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई थी। उपस्थित लोगों ने एक साथ रोज़ा इफ्तार कर आपसी एकता और सौहार्द का परिचय दिया। कार्यक्रम के अंत में देश की खुशहाली, सामाजिक सद्भाव, विश्व शांति तथा समस्त मानवता के कल्याण के लिए सामूहिक दुआ की गई।
गौसे आज़म फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों, रोज़ेदारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी सामाजिक, धार्मिक एवं जनहित से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी।
"या हुसैन! तेरी कुर्बानी हमेशा याद रहेगी।"
कर्बला का पैगाम आज भी इंसानियत, त्याग, सब्र और न्याय का सबसे उज्ज्वल प्रतीक बना हुआ है।

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