कर्बला की दास्तान सुनकर आंखें हुईं नम।

सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
 मुहर्रम की 8वीं तारीख को मस्जिदों व घरों में हजरत इमाम हुसैन व शुहदाए कर्बला की याद में महफिलों का दौर जारी रहा। उलमा किराम ने ‘शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन’ व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। मस्जिदों, घरों व इमाम चौकों पर फातिहा ख्वानी हुई। गौसे आजम फाउंडेशन ने इमाम हुसैन की याद में शहर में कई जगह फल बांटा। फल बांटने में जिलाध्यक्ष समीर अली, हाफिज, मुहम्मद शारिक, सैयद शहाबुद्दीन, जुनैद खान, अहसन खान, नूर मुहम्मद दानिश, मुहम्मद फुजैल, अयान हाश्मी, मुहम्मद नाजिम, जुबैर आदि शामिल रहे।
मकतब इस्लामियात चिंगी शहीद इमाम चौक तुर्कमानपुर में मुहम्मद अनस ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया हसन और हुसैन दोनों दुनिया में मेरे दो फूल हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम से पूछा गया कि अहले बैत में आपको सबसे ज्यादा कौन प्यारा है? तो आपने फरमाया हसन और हुसैन। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत फातिमा से फरमाते थे कि मेरे पास बच्चों को बुलाओ, फिर उन्हें सूंघते थे और अपने कलेजे से लगाते थे। 
गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि जालिम यजीद को सत्य से हमेशा भय रहा, इसलिए अपनी कूटनीति से उसने कर्बला के मैदान में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के परिवारजन एवं समर्थकों को अपनी फौज से तीन दिनों तक भूखा प्यासा रखने के बाद शहीद करा दिया। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया है कि कोई बंदा मोमिने कामिल तब तक नहीं हो सकता जब तक कि मैं उसको उसकी जान से ज्यादा प्यारा न हो जाऊं और मेरी औलाद उसको अपनी जान से ज्यादा प्यारी न हो और मेरे घराने वाले उसको अपने घराने वालों से ज्यादा महबूब न हों।
सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि इमाम हुसैन ने अजीम कुर्बानी पेश कर बातिल कुव्वतों को करारी शिकस्त दी। इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों को सलाम जिन्होंने हक की आवाज बुलंद की और इस्लाम धर्म को बचा लिया। करीब 56 साल पांच माह पांच दिन की उम्र शरीफ में जुमा के दिन मुहर्रम की 10वीं तारीख सन् 61 हिजरी में इमाम हुसैन इस दुनिया को अलविदा कह गए। अहले बैत (पैगंबरे इस्लाम के घर वाले) में से कुल 17 हजरात इमाम हुसैन के हमराह हाजिर होकर रुतबा-ए-शहादत को पहुंचे। कुल 72 अफराद ने शहादत पाई। यजीदी फौजों ने बचे हुए लोगों पर बहुत जुल्म किया।
गुलशने रजा एकेडमी तुर्कमानपुर में आलिमा सबीहा खातून ने कहा कि कर्बला के मैदान में जबरदस्त मुकाबला हक और बातिल के बीच शुरू हुआ। तीर, नेजा और तलवार के बहत्तर जख्म खाने के बाद इमाम हुसैन सजदे में गिरे और अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए शहीद हो गए।
तुर्कमानपुर न्यू कॉलोनी में हाफिज रहमत अली ने कहा कि इमाम हुसैन ने हमें पैगाम दिया कि जो बुरा है उसकी बुराई दुनिया के सामने पेश करके बुराई को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए चाहे जिस चीज की कुर्बानी देनी पड़े, ताकि दुनिया में जो अच्छी सोसाइटी के ईमानदार लोग हैं वह अमन ओ अमान के साथ अपनी जिंदगी गुजार सकें। 
रहमतनगर में सामूहिक रोजा इफ्तार आज। 
गौसे आजम फाउंडेशन की ओर से गुरुवार (नौवीं मुहर्रम) को शाम 6:57 बजे सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर पर सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष समीर अली ने दी है।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि नौवीं व दसवीं मुहर्रम को सभी लोग रोजा रखें। इबादत करें। नौवीं व दसवीं मुहर्रम का रोजा रखने की हदीस में बहुत फजीलत आई है। नौवीं व दसवीं मुहर्रम दोनों दिन का रोजा रखना अफजल है।
शिक्षक मुहम्मद आजम ने बताया कि नौवीं मुहर्रम (25 जून) को सहरी का आखिरी वक्त सुबह 3:29 बजे व इफ्तार का वक्त शाम में 6:57 बजे है। वहीं दसवीं मुहर्रम (26 जून) को सहरी का आखिरी वक्त सुबह 3:30 बजे व इफ्तार का वक्त शाम में 6:57 बजे है।
आज देखिए लाइन की ताजिया।
गुरुवार नौवीं मुहर्रम की रात में लाइन की ताजियों का जुलूस आकर्षण का केंद्र होगा। जिसमें देश-विदेश की मस्जिदों व दरगाहों का मॉडल ताजिया के रूप में देखने को मिलेगा। गुरुवार शाम को ही छोटी-बड़ी ताजिया इमाम चौकों पर रख दी जाएगी। इमाम हुसैन व शुहदाए कर्बला के इसाले सवाब के लिए घरों, मस्जिदों व इमाम चौकों पर फातिहा ख्वानी होगी। शरबत, खिचड़ा व मलीदा पर फातिहा पढ़कर अकीदतमंदों में बांटा जाएगा। शहर के विभिन्न इमाम चौकों से जुलूस भी निकलेगा।

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