आईजीआरएस मामलों में लापरवाही पर डीएम का बड़ा एक्शन, 22 विभागों के अधिकारियों का वेतन रोका।

ब्यूरो चीफ़: किशन जायसवाल, 
बलिया, उत्तर प्रदेश।
जन शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित आईजीआरएस समीक्षा बैठक में शिकायतों के निस्तारण में गंभीर लापरवाही सामने आने पर जिलाधिकारी ने 22 विभागों के अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि 1 जुलाई से 27 जुलाई के बीच कई विभागों द्वारा शिकायतों का निस्तारण तो किया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं से फीडबैक प्राप्त नहीं किया गया। इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण से संबंधित फोटोग्राफ और विस्तृत आख्या भी अपलोड नहीं की गई। जिलाधिकारी ने इसे शासन की मंशा के विपरीत गंभीर लापरवाही बताते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया।
बैठक में एक अन्य गंभीर अनियमितता भी सामने आई। कई प्रकरणों में एल-1 अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना ही एल-2 अधिकारी द्वारा निस्तारण आख्या पर हस्ताक्षर कर दिए गए। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए दोनों संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया और पूछा कि निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किन परिस्थितियों में किया गया।
समीक्षा बैठक से चकबंदी अधिकारी एवं अपर चकबंदी अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने दोनों अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश देते हुए भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की सख्त चेतावनी दी।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक प्रकरण में शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक लिया जाए, निस्तारण से संबंधित फोटोग्राफ एवं विस्तृत आख्या आईजीआरएस पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा निस्तारण रिपोर्ट केवल एल-1 अधिकारी के सत्यापन एवं हस्ताक्षर के बाद ही पोर्टल पर अपलोड की जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में आईजीआरएस सर्वोच्च स्थान पर है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में दोबारा ऐसी लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध और अधिक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार, अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी गुलशन जी, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय कुमार राय सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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