मृत्यु भोज का बहिष्कार कर पूर्व जिला पार्षद ने पेश की सामाजिक बदलाव की मिसाल।

बौद्ध विधि से हुई श्रद्धांजलि सभा, भिक्षुओं ने की प्रार्थना, महाप्रसाद के रूप में वितरित की गई खीर
वारिसलीगंज, नवादा, बिहार।
समाज में व्याप्त मृत्यु भोज जैसी परंपराओं के विरुद्ध  वारिसलीगंज प्रखंड अंतर्गत मकनपुर पंचायत के मसूदा गांव की पूर्व जिला पार्षद श्रीमति मीना देवी एवं उनके छोटे भाई पंचम लाल ने अपनी माता स्वर्गीय सुहागिन देवी के निधन के उपरांत पारंपरिक मृत्यु भोज का पूर्णतः बहिष्कार कर सामाजिक सुधार का संदेश दिया। उन्होंने अनावश्यक खर्च एवं आडंबर से दूर रहते हुए बौद्ध विधि से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर अपनी माता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि सभा में समाजसेवी एवं बौद्ध धर्म प्रचारक सुमन सौरभ के नेतृत्व में कई बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। भिक्षुओं ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण, पंचशील एवं मंगल पाठ के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना की। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय सुहागिन देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन समर्पित किए तथा उनके सादगीपूर्ण एवं प्रेरणादायी जीवन को याद किया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु भोज जैसी परंपराओं में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, जिससे कई गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं। ऐसे समय में यदि श्रद्धांजलि सभा, प्रार्थना और समाजहित के कार्य किए जाएं तो दिवंगत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म करुणा, समानता, सादगी और मानव सेवा का संदेश देता है तथा समाज को कुरीतियों से मुक्त करने की प्रेरणा देता है।
पूर्व जिला पार्षद श्री मति मीना देवी एवं पंचम लाल ने कहा कि उनकी माता का जीवन सादगी, परिश्रम और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण था। उनकी स्मृति में उन्होंने मृत्यु भोज जैसी परंपरा पर खर्च करने के बजाय सादगी से श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और लोग दिखावे के बजाय सामाजिक सरोकारों को महत्व दें।
श्रद्धांजलि सभा में उपरांत सभी उपस्थित मृतक सुहागिन देवी के पति विशेश्वर महतो एवं उनके सभी पुत्रीयों, दामाद महेश प्रसाद सहित परिवार के सभी सदस्यों ने लोगों के बीच महाप्रसाद के रूप में खीर का वितरण किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, बुद्ध अनुयायी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने और सादगीपूर्ण सामाजिक परंपराओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व जिला पार्षद की यह पहल केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला संदेश है। यदि अधिक लोग इस प्रकार की सादगीपूर्ण परंपराओं को अपनाएं तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ने वाला अनावश्यक बोझ कम होगा और समाज में सामाजिक समरसता एवं जागरूकता का वातावरण मजबूत होगा।मौके पर पैक्स अध्यक्ष सुरेन्द्र यादव, पपु चौधरी, अरूंजय मेहता सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

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