जमुई के शैक्षणिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात, चार नए प्रखंडों में डिग्री कॉलेजों का भव्य वर्चुअल उद्घाटन।
शिक्षा ही पीढ़ियों की सोच में गुणात्मक बदलाव का अचूक अस्त्र, इससे होगा बौद्धिक व सांस्कृतिक चेतना का विस्तार– जिला पदाधिकारी"•ब्यूरो चीफ मोहम्मद ग़ुलाम सरवर।
जमुई बिहार।
जिले के शैक्षणिक और सामाजिक विकास के इतिहास में आज का दिन एक युगांतरकारी रहा। भागलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह से बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के नव स्थापित 211 प्रखंडों के डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत जमुई जिले के चार प्रमुख प्रखंडों—लक्ष्मीपुर, सोनो, खैरा एवं इस्लामनगर अलीगंज—में नव स्थापित डिग्री महाविद्यालयों का औपचारिक उद्घाटन संपन्न हुआ, जिससे आज से ही इन परिसरों में पठन-पाठन का औपचारिक कार्य प्रारंभ हो गया ।
यह उपलब्धि जमुई के लिए केवल एक प्रशासनिक सफलता मात्र नहीं है, बल्कि अतीत में नक्सलवाद का दंश झेल चुके इस क्षेत्र के लिए एक बड़े अवसर और यहां के जनता के ज़ख्मों पर शीतल मरहम के समान है। सरकार की यह दूरगामी सोच सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों को उनके घर के समीप ही उच्च शिक्षा का अवसर और साधन उपलब्ध कराना जिले के शैक्षणिक उत्थान की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है।
इस गौरवमयी अवसर पर नवसृजित राजकीय डिग्री महाविद्यालय खैरा,से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े जिला पदाधिकारी ने इसे जिले के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायी संबोधन में शिक्षा की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “ शिक्षा वह अचूक अस्त्र है जो न केवल व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है, बल्कि पीढ़ियों के व्यवहार और सोच में भी गुणात्मक परिवर्तन लाता है। आर्थिक संपन्नता जहाँ केवल भौतिक समृद्धि का मार्ग खोलती है, वहीं शिक्षा हमारी बौद्धिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार करती है।"
आगे जिला पदाधिकारी ने जमुई के अतीत की चर्चा करते हुए कहा कि यह जिला लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण दोहरी मार झेला है। पहले बुनियादी सुविधाओं का अभाव और बाद में नक्सलवाद ने विकास की गति को पूरी तरह बाधित कर दिया था। परंतु, अब समय बदल चुका है। यह जिला नक्सलवाद के साए से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। अब अतीत की कड़वी यादों को भूलकर सिर्फ और सिर्फ विकास की बातें करने का समय है।
आगे उन्होंने जिले के सांस्कृतिक उत्थान और पर्यटन के क्षेत्र में विकास की प्रशासनिक प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा कि जिला प्रशासन लछुआड़, गिद्धेश्वर धाम सहित जिले के तमाम महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के कायाकल्प हेतु एक व्यापक रोड मैप पर काम कर रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन चोरमारा और गुरमाहा जैसे सुदूर क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास हेतु पूरी तरह संकल्पित और प्रतिबद्ध है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि अब जब उच्च शिक्षा स्वयं चलकर आपके चौखट तक आई है, तो सभी नागरिकों को इसका बढ़-चढ़कर लाभ उठाना चाहिए। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग से आगे बढ़कर पारंपरिक उच्च शिक्षा में भी करियर के असीम और बेहतरीन अवसर मौजूद हैं। यह नव स्थापित कॉलेज स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा।
इसी क्रम में, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि संसाधनों व दूरी के कारण जिन छात्राओं को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती थी, अब वे अपने ही प्रखंड में मान-सम्मान और सुरक्षा के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। साथ ही, उन्होंने कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए अपना विशिष्ट योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष श्री राजकिशोर सिंह ने अपने संबोधन में इस क्षेत्र के डिग्री कॉलेज स्थापित करने के लंबे संघर्षों को याद किया। उन्होंने जिले के चार प्रखंडों में नवसृजित डिग्री कॉलेज की इस ऐतिहासिक सौगात के लिए बिहार सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने जमुई को चार नए कॉलेजों के रूप में एक उज्ज्वल भविष्य सौंपने के लिए विशेष रूप जिला पदाधिकारी के सद्प्रयासों के लिए सहृदय आभार प्रकट किया।
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