लंका दहन केवल एक घटना नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का प्रतीक है:- राजन जी महाराज
बलिया, उत्तर प्रदेश।
जनप बलिया के करिहरा, बेरुआरबारी वीरवार स्थित बाबा भगवान दास मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मंगलवार को समापन हो गया। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने कथा के अंतिम दिन लंका दहन और भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता सहित हनुमान जी सुग्रीव, जामवंत, विभीषण, अंगद आज सभी के अयोध्या लौटने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। महाराज ने कहा की लंका दहन केवल घटना नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का प्रतीक है। उन्होंने हनुमान जी की भक्ति साहस और समर्पण का वर्णन करते हुए बताया कि प्रभु के प्रति सच्ची श्रद्धा असंभव कार्यों को भी संभव बनाती है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हो।
प्रबचन के दौरान राजन जी महाराज ने भगवान राम द्वारा रावण के अंत के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का वर्णन किया। उन्होंने भगवान राम के अयोध्या आगमन और राजतिलक के प्रसंग को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान राम ने सत्ता को सेवा का माध्यम माना और आदर्श शासन की स्थापना की, जिसे "राम राज्य" कहा जाता है रामराज्य में न्याय, समानता और जन कल्याण सर्वोपरि था।
महाराज ने श्रद्धालुओं से भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतरने और सत्य, त्याग व मर्यादा का पालन करने का आह्वान किया। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे,उन्होंने पूरे ध्यान से कथा का श्रवण किया और भजनों पर घूमते रहे।
कथा का समापन आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजक बाबा अमरनाथ सेवा समिति के संयोजक एवं विधायक केतकी सिंह, पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी, पूर्व विधायक संजय यादव, विश्राम सिंह, शांत स्वरूप सिंह, राकेश सिंह, बृजभान सिंह, बिरजू साहनी, अमरजीत सिंह, प्रमोद सिंह, मिथिलेश तिवारी, रेखा सिंह, ममता सिंह, नितेश सिंह, ननकू सिंह, डॉक्टर सुवेलाल चौहान, नारायण सिंह, सुनील सिंह, पारस सिंह, अनिल सिंह आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन सुरेंद्र सिंह मुन्ना ने किया।
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