औरंगाबाद में कुरआन के तर्जुमा व मफाहीम पर विशेष क्लास का आयोजन।
सैय्यद अनवर कादरी
औरंगाबाद, महाराष्ट्र।
औरंगाबाद बाबुल-इल्म लाइब्रेरी की ओर से रविवार को क्रांति चौक स्थित उन्नति हॉल में "कुरआन: तर्जुमा और मफाहीम" विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना डॉ. सैयद जमीर अब्बास जाफरी रहे, जिन्होंने कुरआन के संदेश को समझने और उसे जीवन में उतारने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में मौलाना डॉ. सैयद जमीर अब्बास जाफरी ने कहा कि "कुरआन पर अमल करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। यह केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक मुकम्मल निज़ाम (जीवन प्रणाली) लेकर आया है। इसलिए हर व्यक्ति को कुरआन के संदेश को समझना और उसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए।"
कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी अब्दुल्लाह मकरोनी द्वारा पवित्र कुरआन की तिलावत से हुई। इसके बाद उन्होंने कुरआन की तफ़सील और उसके संदेश पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर हामिल-ए-कुरआन ने कुरआन की तफ़्सीर और तर्जुमा प्रस्तुत किया। वहीं फ़ैज़ भाई, शोएब भाई, डॉ. मसूद नजमी, डॉ. ज़िया तथा मुबारक बिन हैदरा ने कुरआन के ग्रामेटिकल तर्जुमा की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि लगभग 80 घंटे के विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से कुरआन की ग्रामर और तर्जुमा की कक्षाएं संचालित की जाती हैं, जिससे प्रतिभागी कुरआन को सीधे समझने में सक्षम हो सकें।
कार्यक्रम की एक विशेष बात यह रही कि शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों ने एक साथ मिलकर कुरआन को समझने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम में भाग लिया। उपस्थित लोगों ने इसे आपसी भाईचारे, एकता और कुरआनी शिक्षा के प्रसार की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल बताया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में विशेष रूप से डॉ. सैयद शाहेद साहब (RTO) एवं जनाब शब्बीर (शब) भाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दोनों ने कार्यक्रम के आयोजन, समन्वय और व्यवस्थाओं को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के धर्मप्रेमी, विद्यार्थी एवं विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित रहे। आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
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