सीतापुरा गैस बॉटलिंग प्लांट के खिलाफ एफआईआर दर्ज, कोर्ट को सूचित करेगा थाना।
जयपुर, राजस्थान|
राजस्थान। उच्च न्यायालय में लंबित सीतापुरा आईओसीएल गैस बॉटलिंग प्लांट को आबादी से दूर हस्तांतरित करने की मांग करने वाली जनहित याचिका में पारित खंडपीठ के 25 जुलाई 2024 के आदेश के अनुरूप पुलिस थाना सांगानेर सदर ने आईओसीएल प्लांट प्रभारी संजय गुप्ता, सेक्यूरिटी प्रमुख सहित स्थानीय प्रबंध निदेशक के विरुद्ध प्लांट के बाहर सड़क पर गैस से भरे टैंकर और ट्रक खड़े करने के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की है और खंडपीठ के आदेशानुसार इसकी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट को प्रेषित की जा रही है ।
याचिकाकर्ता ओम प्रकाश टाक ने अपने अधिवक्ता डॉ अभिनव शर्मा के जरिए न्यायालय में शपथपत्र पेश कर यह जानकारी न्यायालय को दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि आईओसीएल को प्रारंभिक सुनवाई में ही प्लांट के बाहर सड़क पर एलपीजी से भरे सिलेंडर लदे ट्रक और एलपीजी टैंकर सड़क पर खड़ा करने पर खंडपीठ ने अपने आदेश से रोक लगा दी थी लेकिन गैस फिलिंग स्टेशन के बाहर लगातार कतारबद्ध ट्रक और टैंकर एलपीजी से भरे खड़े रखे जाते थे।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देशित किया था कि यदि ऐसा होता पाया जाए तो सांगानेर सदर थाने पर मुकदमा दर करवाया जाए और ऐसा कोई भी मामला प्रकाश में आने पर न्यायालय को पुलिस सूचित करे।
याचिकाकर्ता ओम प्रकाश ने जियोटैगिंग लोकेशन सहित फोटो और वीडियो के साथ ट्रक और टैंकर के नंबर सहित पुलिस को इस आशय की रिपोर्ट दी कि 10 जुलाई 2026 और इससे पूर्व लगातार आईओसीएल द्वारा लापरवाही पूर्ण रवैया अपनाते हुए कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी सड़क पर न केवल घरेलू ईंधन से भरे सिलेंडरों के ट्रैक और टैंकर खड़े रहते है बल्कि कुछ माह पूर्व ऐसे ही एक गैस सिलेंडर से लदे ट्रक में आग की घटना होने की भी बात सामने आई थी लेकिन गैस कंपनी ने इसकी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कर मामले को दबा दिया और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल की पालना नहीं की।
याचिकाकर्ता ने बताया कि प्लांट मैनेजर इंचार्ज संजय गुप्ता और सिक्युरिटी हेड हरसहाय द्वारा गंभीर लापरवाही बरत कर आम जन के जान माल को हानि कारित करने का काम किया जा रहा है और आग लगने की घटना को भी छुपाया गया है जिसकी आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल के तहत नियमानुसार फायर इंसीडेंट रिपोर्ट बनाई जानी चाहिये थी और जिला प्रशासन सहित डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग और ओआईएसडी को भी सूचना दी जानी चाहिए थी लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई और मामला रफा दफा कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने शपथपत्र में आईओसीएल को गैरजिम्मेदार और लापरवाह संस्थान करार देते हुए इसे तुरंत स्थानांतरित करने की मांग की है, मामले में अब 27 जुलाई को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में इस पर सुनवाई होगी।
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