सूरह नास ईमान को मजबूत व बुराइयों से बचने की प्रेरणा देती है - अनस नक्शबंदी

तुर्कमानपुर, नौरंगाबाद व जाफरा बाजार में कुरआन शरीफ का विशेष व्याख्यान। 
सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में कुरआन शरीफ के विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। सूरह नास की सरल एवं प्रभावशाली व्याख्या की गई।
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सूरह नास कुरआन शरीफ की 114वीं और अंतिम सूरह है। इसमें छह आयतें हैं।यह सूरह हर इंसान को अल्लाह तआला की पनाह में रहने की तालीम देती है। इस सूरह में हमें सिखाया गया है कि इंसान को हर तरह की बुराई, शैतान के बहकावे, बुरे ख्यालात और दिल में पैदा होने वाले वसवसों से बचने के लिए सिर्फ अल्लाह की शरण लेनी चाहिए। जब इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा करता है और उसकी बताई हुई राह पर चलता है, तो अल्लाह उसे दीन और दुनिया दोनों में कामयाबी अता फरमाता है।
उन्होंने कहा कि सूरह नास का सबसे बड़ा पैगाम यह है कि चाहे परेशानी कैसी भी हो, मदद और हिफाजत केवल अल्लाह से मांगी जाए। यह सूरह इंसान के ईमान को मजबूत करती है, दिल को सुकून देती है और बुराइयों से बचने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि कुरआन का समापन इस सूरह के साथ होना यह दर्शाता है कि इंसान को जीवन के हर मोड़ पर अल्लाह की सुरक्षा की जरूरत है। 
विशिष्ट वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि हर इंसान को अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही सबका रक्षक और पैदा करने वाला है। पूरी कायनात का असली मालिक और हाकिम अल्लाह है। इबादत के लायक सिर्फ और सिर्फ अल्लाह ही है। कुरआन शरीफ इंसानियत के लिए मुकम्मल रहनुमाई है। यदि हम इसकी शिक्षाओं पर अमल करें तो हमारे घर, समाज और मुल्क में अमन, भाईचारा, अच्छे अखलाक और आपसी मुहब्बत का माहौल कायम हो सकता है।
अंत में दुरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में आपसी मुहब्बत व भाईचारे के लिए दुआ की गई। व्याख्यान में आसिफ महमूद, आस्मा खातून, अदीबा, सानिया, उम्मे ऐमन, ज्या वारसी, जिक्रा शेख, शिरीन आसिफ, तानिया अख्तर, शिफा खातून, फिजा खातून, शिफा नूर, नूरजहां शरीफी, असगरी खातून, मुबश्शिरा कुरैशी, मुअज्जमा कुरैशी, रहनुमा सहित बड़ी संख्या में इस्लामी भाई व बहनें उपस्थित रहीं।
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