औलाद की परवरिश कुरआन और सुन्नत की रोशनी में करें : अरबिया फातिमा।

तुर्कमानपुर में महिलाओं की 34वीं महाना दीनी संगोष्ठी 
सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 
तुर्कमानपुर स्थित मदरसा रजा-ए-मुस्तफा में महिलाओं की 34वीं महाना दीनी संगोष्ठी का आयोजन हुआ। अध्यक्षता आस्मा खातून ने की। 
मुख्य वक्ता आलिमा अरबिया फातिमा ने कहा कि बच्चों की अच्छी परवरिश और घर की जिम्मेदारियों को ईमानदारी, सब्र और अल्लाह की रजा के लिए निभाया जाए तो यही काम इंसान के लिए नेकी और सवाब का बड़ा जरिया बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि मां की गोद बच्चे की पहली तालीमगाह होती है। इसलिए मांओं को चाहिए कि वे अपनी औलाद की परवरिश कुरआन और सुन्नत की रोशनी में करें, उन्हें अच्छे अखलाक, नमाज, सच्चाई, अदब और इंसानियत की शिक्षा दें। घर का माहौल जितना दीनी और पाकीजा होगा, आने वाली नस्ल उतनी ही बेहतर बनेगी।
शिफा खातून ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को परिवार की इस्लाह और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। यदि घर की जिम्मेदारियां अल्लाह की खुशी के लिए निभाई जाएं तो रोजमर्रा के काम भी इबादत का दर्जा हासिल कर लेते हैं। उन्होंने महिलाओं से दीन की तालीम हासिल करने और उसे अपने जीवन में अमल के साथ अपनाने की अपील की।
संगोष्ठी का आगाज खुशी नूर ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से किया, जबकि सुमैया व सना फातिमा ने नात-ए-पाक पेश की।  अंत में दुरूद-ओ-सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व खुशहाली की दुआ की गई। संगोष्ठी में मुबश्शिरा कुरैशी, फिजा खातून, उम्मे ऐमन, ज्या वारसी, जिक्रा शेख, अख्तरुन निसा, शबाना खातून, रजिया, अस्गरी खातून, आस्मा खातून, तस्मी, फलक, नूरी, नूर अज्का, आलिया, खुशी नूर, मुस्कान, तैबा नूर सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।

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