कम वर्षा के बीच वैकल्पिक फसलों की तैयारी और उर्वरक प्रबंधन को लेकर जिला उर्वरक निगरानी समिति की बैठक संपन्न।
ब्यूरो चीफ मोहम्मद ग़ुलाम सरवर।
जमुई, बिहार।
जिले में कम वर्षापात से उत्पन्न स्थिति, कृषि कार्यों की प्रगति और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर आज जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला उर्वरक निगरानी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के माननीय विधायकों एवं सांसदों के प्रतिनिधियों सहित जिला कृषि पदाधिकारी श्री हरि मोहन मिश्र तथा अन्य वरीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान जिले में कृषि की वर्तमान चुनौतियों और किसानों को राहत पहुंचाने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में समीक्षा के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी ने वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में धान के बिचड़े का आच्छादन तो लक्ष्य का 98 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है, परंतु वर्षापात काफी कम होने के कारण मुख्य धान की रोपनी की गति अत्यंत नगण्य है। जिले में कुल लक्षित आच्छादित रकवा 69,501.20 हेक्टेयर निर्धारित है, जिसके विरुद्ध अब तक मात्र 332.50 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपनी हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का महज 0.48 प्रतिशत है। इस गंभीर और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए उपस्थित माननीय जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधियों ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली आकस्मिक फसलों के बीज अविलंब उपलब्ध कराने का बहुमूल्य सुझाव दिया। कम वर्षा से उत्पन्न होने वाली संभावित आपदा को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने बेहद संवेदनशीलता के साथ निर्देश दिया कि अब से प्रत्येक सोमवार को अनिवार्य रूप से आपदा प्रबंधन समिति की विशेष बैठक आयोजित की जाए ताकि कृषि और जल संरक्षण से जुड़ी जमीनी स्थितियों की निरंतर समीक्षा और निगरानी की जा सके।
जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा जिले में खाद की उपलब्धता पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि वर्तमान में जिले के तमाम थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के पास डी०ए०पी०, एन०पी०के०, एम०ओ०पी०, एस०एस०पी० एवं यूरिया प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिससे किसानों को किसी भी तरह की किल्लत नहीं होगी। इसके साथ ही जुलाई माह के अंत तक जिले की मांग के अनुसार उर्वरकों की अतिरिक्त खेप भी मंगा ली जाएगी। किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर ही खाद उपलब्ध हो और इसके वितरण में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए जिला कृषि कार्यालय में एक विशेष उर्वरक हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किया गया है। किसान किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या के समाधान के लिए मोबाइल नंबर 6203941526, 9801465530 एवं 7903892185 पर सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे के बीच सीधे संपर्क कर सकते हैं।
जिला प्रशासन ने खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण करने वाले तत्वों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसके लिए पूरे जिले में चार विशेष धावा दलों का गठन किया गया है, जो थोक एवं खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर निरंतर औचक छापामारी करेंगे। यदि कहीं भी मूल्य से अधिक राशि लेने या किसी भी प्रकार की तकनीकी अनियमितता पाए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर विधि-सम्मत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बैठक के समापन पर जिला पदाधिकारी ने जिला कृषि पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे प्रशासनिक स्तर से पूरा समन्वय स्थापित करें और स्थानीय अनुमंडल व पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग लेते हुए यह सुनिश्चित करें कि हर हाल में किसानों को सही मूल्य पर उर्वरक मिले और बिचौलियों व कालाबाजारी करने वालों पर पूरी सख्ती बरती जाए।
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