सहयोग शिविर,सहयोग पोर्टल मात्र छलावा,जनता को दिगभ्रमित करने,भीड़ जुटाने का नया आयाम:-- सुरैया शहाब
बेतिया, बिहार।
बिहार सरकार ने जनता के भूमि संबंधी समस्याओं का निपटारा करने हेतु सहयोग शिविर,सहयोग पोर्टल लंच किया,मगर जिस उद्देश्य के चलते इसको लंच किया गया उसका सही उपयोग नहीं हो रहा है,इसके माध्यम सेआज भी दाखिल खारिज के साथ परिमार्जन या जमीन से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।सहयोग पोर्टल पर कंप्लेंट रजिस्टर करने के बाद भी इस पर केवल खाना पूर्ति की जा रही है। संबंधित अधिकारी उस कंप्लेंट पर दो-चार लाइन लिख करके उस कंप्लेंट को बिना समाधान किए हटा दे रहे हैं, जिससे लोगों की भूमि संबंधित समस्याओं का निपटारा नहीं हो रहा है, समस्या जस की तस बनी रहती है।परिमार्जन, परिमार्जन प्लस,परिमार्जन प्लस टू या दाखिल खारिज से जुड़ा कोई भी समस्या सहयोग पोर्टल पर कंप्लेंट के माध्यम से रजिस्टर्ड किया जा रहा है,तो उसे पर जिला स्तर के जोअधिकारी जमीन से जुड़े हुए मामलों को बिना निष्पादन किए उसको रिजॉल्व कर दे रहे हैं,आखिर समस्या का समाधान कैसे होगा,अगरआंचल में किसी भी प्रकार की कोई समस्या को लेकर जनता जाती है तो उसका समाधान नहीं हो रहा है,सहयोग पोर्टल पर उसको डाला गया,उसके बाद भी केवल दो चार लाइन लिख करके उसको बंद कर दिया जा रहा है,ऐसे तो लोगों की दाखिल खारिज,परिमार्जन परिमार्जन प्लस,याअन्य जमीन से जुड़ी हुई समस्याएं कभी भी खत्म नहीं होगी।लोगों को लगातार कमेंट के माध्यम से सूचनाओं मिल रही हैं,वह संतोषप्रद नहीं
सहयोग पोर्टल के माध्यम से सभी लोगों का दाखिल खारिज,परिमार्जन प्लस या अन्य समस्या का सही तौर पर निष्पादित नहीं किया जा रहा है। बिहार सरकार को सहयोग पोर्टल पर दिए गए कंप्लेंट याआवेदनअगर कोई सही एक्शन नहीं हो रहा है, तो उसे कंप्लेंट को बंद किए बिना उसकी दोबारा लोगों कोअपना प्रतिक्रिया देने के लिए इस कंप्लेंट कोओपन रखने की जरूरत है,ताकि यदि कोई अधिकारी एक बार में उसपर कोई सही एक्शन ना लेकर केवल खानापूर्ति करता है तो दोबारा यूजर फिर से अपनी समस्याओं को वहां पर सवाल के माध्यम से रख सके,जबतक किसी समस्या का सही तरीके से समाधान नहीं होता है,तब तक उस कंप्लेंट को क्लोज कैसे किया जाये। ऐसी स्थिति में कहा जा सकता है कि सहयोग शिविर,सहयोग पोर्टल जो सरकार के द्वाराआयोजन किया जा रहा है,वह मात्र छलावा,जनता को दिगभ्रमित करने वाला समस्या का समाधान नहीं करने वाला है।
सरकारआम जनता के भूमि संबंधी समस्याओं का निपटारा करना नहीं चाहती इससेअंचल में कार्यरत अंचलअधिकारी,राजस्व कर्मी एवं अन्य कर्मियों को मालामाल करने का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।जनता के भूमि विवाद के समस्याओं का निपटारा शिविर,पोर्टल के माध्यम से नहीं करके कोई दूसरा विकल्प निकालना पड़ेगा ताकि जनता का भूमि संबंधी समस्याओं का निपटारा हो सके। इस पर सरकार को ध्यान देने कीआवश्यकता है।
इसके पूर्व में भी सरकार के द्वारा राजस्व महाअभियान चलाया गया था,जिसमें जिले से हजारों हजारआवेदन प्राप्त हुए थे,मगर उसका आज तक कोई निपटारा नहीं हो सका,ठीक उसी प्रकार यह सहयोग शिविर,सहयोग पोर्टल का ही हाल हो रहा है
यहअभियान केवल भीड़ जुटाना का एकमात्र साधन है
समस्या का समाधान का नहीं सरकार आम जनता के ध्यान को जनता के मूल समस्याओं आवश्यकताओं कीओर से हटाने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया है,ताकि जनता सरकार सेअपने मूलभूत सुविधाओं कीओरआकर्षित नहीं हो,जैसा कि महंगाई, बेरोजगारी,पलायन,शिक्षा चिकित्सा,स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं कीओर उनकाध्यान ही नहीं जाए,सरकार सेअपनी मांगों को नहीं मांग सकें।स्थानीय
मानवाधिकार सह सामाजिक कार्यकर्ता,सुरैया शहाब ने सरकार कोआड़े हाथ लेते हुए
कहा है कि सरकार इस तरह की बंद करके सही दिशा में
जनता की भलाई,ज्वलंत समस्याओं का समाधान तवरित गति से करने हेतु पाखंड का रास्ता छोड़कर
सही दिशा में कदम उठाए,
यह जानता है सब कुछ जानती है। इस डिजिटल युग में जनता डिजिटललाइजड हो गई है,सोशल मीडिया के जमाने में हर बात की जानकारी तुरंत हो जा रही है
जनता कोअब बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है।
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