मोबाइल,माइक पकड़ लेने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता:-न्यायालय की टिप्पणी।
बेतिया, बिहार।
डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि मोबाइल फोन के साथ साथ माइक्रोफोन रखने वाला लगभग हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर बताने लगा है,जबकि केवल वीडियो रिकॉर्ड कर लेना या फिर घटनास्थल पर पहुंच कर जिम्मेदार पत्रकार नहीं कहा जा सकता है।प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार को ऐसा संतुलित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार करना चाहिए,जो मीडिया की स्वतंत्रता के साथ-साथ पेशेवर जवाबदेही,नैतिक मानकों,कानून के शासन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता रहे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता केवल खबर जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि तथ्यों की सत्यता, नैतिक जिम्मेदारी,कानून के प्रति जवाबदेही होती है। डिजिटल,सोशल मीडिया के विस्तार के कारण कई लोग बिना पेशेवर प्रशिक्षण के खुद को पत्रकार बताकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं,जो चिंता का विषय है।पूर्व में न्यायालय ने यूट्यूब चैनल में काम करने वाले पत्रकारों हमले के सिलसिले मेंअपने विचार व्यक्त किए,साथ ही न्यायालय ने डिजिटल पत्रिकारिता की चुनौती, जिम्मेदार मीडिया व्यवस्था कीआवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की थी।
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