जब तक व्यक्ति अपने भीतर रामत्व का विकास नहीं करेगा तब तक समाज में वास्तविक शांति, सद्भाव और नैतिकता स्थापित नहीं हो सकती - राजन जी महाराज

धनंजय कुमार शर्मा 
बांसडीह,बलिया। उत्तर प्रदेश। 
धार्मिक आयोजन तभी सफल माना जाता है,जब उसके समापन के बाद भी उसकी गूंज लोगों के मन, विचार और जीवन में लंबे समय तक बनी रहे। बेरूआरबारी क्षेत्र के भगवान दास मंदिर, करीहरा में बाबा अमरनाथ सेवा समिति एवं बांसडीह विधायक केतकी सिंह के संयोजन में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव ने यही प्रमाणित किया। विश्वविख्यात कथा वाचक राजन जी महाराज की ओजस्वी एवं भावपूर्ण वाणी ने नौ दिनों तक पूरे क्षेत्र को राममय बनाए रखा। यह आयोजन केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों और सामाजिक समरसता का सशक्त जनआंदोलन बनकर उभरा।
      कथा के पहले ही दिन से यह स्पष्ट हो गया था कि करीहरा की धरती किसी सामान्य धार्मिक कार्यक्रम की नहीं, बल्कि एक विराट आध्यात्मिक महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। सुबह से लेकर कथा समापन तक श्रद्धालुओं की निरंतर उमड़ती भीड़, जय श्रीराम के गगनभेदी उद्घोष, मधुर भजनों की स्वर लहरियां और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को एक लघु अयोध्या का स्वरूप प्रदान कर दिया।
       राजन जी महाराज ने श्रीरामचरितमानस के प्रत्येक प्रसंग को केवल कथा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के व्यवहारिक दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। श्रीराम जन्म से लेकर सीता 51स्वयंवर, वनगमन, केवट की निष्काम भक्ति, भरत-राम मिलन, माता शबरी का प्रेम, रावण वध और अंततः रामराज्य की स्थापना तक प्रत्येक प्रसंग को उन्होंने वर्तमान समाज से जोड़ते हुए मर्यादा, सत्य, सेवा, त्याग, कर्तव्य, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। यही कारण रहा कि कथा सुनने वाला प्रत्येक व्यक्ति केवल श्रोता नहीं रहा, बल्कि स्वयं को कथा का सहभागी अनुभव करता रहा।
      पूरे आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कथा ने समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में बांध दिया। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज में उतनी ही गहरी हैं। कथा के दौरान प्रस्तुत संगीतमय भजन, आकर्षक झांकियां, पुष्पवर्षा और श्रीराम जन्मोत्सव, विवाहोत्सव तथा राज्याभिषेक जैसे प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
       राजन जी महाराज के प्रवचनों का मूल संदेश यही रहा कि भगवान श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि आदर्श जीवन के सर्वोच्च मार्गदर्शक हैं। उन्होंने बार-बार कहा कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर रामत्व का विकास नहीं करेगा, तब तक समाज में वास्तविक शांति, सद्भाव और नैतिकता स्थापित नहीं हो सकती। उनके प्रवचनों ने धर्म को कर्म, भक्ति को व्यवहार और कथा को जीवन से जोड़ने का कार्य किया।
    इस आयोजन की सफलता में विधायक केतकी सिंह की सक्रिय भूमिका भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने केवल आयोजन का संयोजन ही नहीं किया, बल्कि प्रतिदिन व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर श्रद्धालुओं के साथ कथा श्रवण किया। आयोजन में प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसकी भव्यता को और बढ़ाया।
      बाबा अमरनाथ सेवा समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिस प्रकार की व्यवस्थाएं कीं, वह आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनीं। विशाल कथा पंडाल, सुव्यवस्थित बैठक व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग तथा प्रतिदिन की गई व्यवस्थाओं ने हजारों श्रद्धालुओं को सहज और अनुशासित वातावरण उपलब्ध कराया। समापन दिवस पर आयोजित विशाल भंडारे में उमड़ी भीड़ ने आयोजन की लोकप्रियता को और प्रमाणित किया।
     करीहरा की यह नौ दिवसीय श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रही, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा, समर्पण, भाईचारा और राष्ट्रधर्म का संदेश देने वाला एक प्रेरक अभियान सिद्ध हुई। राजन जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने जहां श्रद्धालुओं के हृदय में श्रीराम के प्रति अटूट आस्था का संचार किया, वहीं इस आयोजन ने यह भी सिद्ध कर दिया कि जब धर्म, संस्कृति और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तब केवल आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास रचा जाता है।
     निस्संदेह, भगवान दास मंदिर, करीहरा में आयोजित यह नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव पूर्वांचल के उन यादगार धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गया है, जिसकी चर्चा केवल इसकी भव्यता के लिए नहीं, बल्कि समाज को दिए गए संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मूल्यों के अमूल्य संदेश के लिए भी लंबे समय तक होती रहेगी।

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