मदरसा,संस्कृत शिक्षकों का 6 माह से वेतन का भुगतान का नहीं होने से भुखमरी की कगार पर।
बेतिया, बिहार।
यहअजब विडंबना ही कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल में,मदरसाऔर संस्कृत शिक्षकों का 6 महीने से वेतन भुगतान का नहीं होना,उनके परिवार के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।मदरसाऔर संस्कृत शिक्षक संघ के राज्यव्यापी संगठनों ने यह कहने पर मजबूर हो गए हैं के नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद छोड़ते ही मदरसा और संस्कृत शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार शुरू हो गया है,इन शिक्षकों का वेतन का भुगतान नहीं होने से उनके परिवार के सदस्यों में भुखमरी का शिकार होनाआम बात बन गई है,इन शिक्षकों के परिवार हर स्तर से कठिनाइयों का सामना कर रहा है,बच्चों की पढ़ाई, पालन पोषण,भोजन, सामाजिक सरोकार सभी
प्रभावित हो रहे हैं।संवाददाता ने जिला के इन विद्यालयों के भ्रमण करने के उपरांत यह पाया कि इन शिक्षको के विद्यालयों के जांच के नाम पर उनका वेतन भुगतान बंद कर दिया गया है,जबकि इन विद्यालयोंऔर इनके शिक्षकों का जांच रिपोर्ट सचिवालय पहुंच चुका है, इसके साथ ही,इसके बावजूद भी इन मदरसा और संस्कृत शिक्षकों का वेतन भुगतान हेतु राशि विभाग के द्वाराआवंटित नहीं की जा रही है।
इतना ही नहीं,जिले के इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है,जबकि सैकड़ो यूनिट खाली पड़े हुए हैं, इन खाली पड़े हुए रिक्त पद पर,शिक्षकों का नियुक्ति होनाअनिवार्य प्रतीत हो रहा है,विद्यालयों में पद रिक्त रहने के कारण विषय से संबंधित शिक्षक नहीं रहने के कारण भी पठन-पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा है,मगर सरकार के शिक्षा विभाग के मंत्री,मिथिलेश तिवारी, सचिव,निदेशक के कान पर जूं तक नहीं रह रही है।
सरकार का उद्देश्य शिक्षा का बढ़ावा देना,छात्र, छात्राओं के जीवन के उद्देश्य की प्रतिपूर्ति करना सरकार की जिम्मेदारी बनती है,इसके लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती करना,शिक्षकों के भुगतान के प्रति सरकार का यह रवैया निसंदेह ही
लापरवाही का द्योतक है।इस संबंध में,जिला के मदरसा शिक्षक संगठन केअध्यक्ष,कलीमुल्लाह ने अपने 6 महीना से बंद शिक्षकों के वेतन भुगतान करने हेतुअपनी व्यथा व्यक्त की।
Comments
Post a Comment