न्यायालय द्वारा वारंट निर्गत के बादभी सीओ पकड़ से दूर,न्यायालय में उपस्थित नहीं।
बेतिया, बिहार।
इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि न्यायालय के आदेश का भी सरकारी पदाधिकारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है, इसकीअवहेलन करने पर तुले हैं,तो फिरआम जनता क्यों नहीं कर सकती है। इस घटना से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पुलिस प्रशासन जानबूझकर वारंट तमिला करने में देरी कर रही है,इससे यह स्पष्ट हो जा रहा है कि पुलिस प्रशासन वारंटी का समर्थन कर रहा है,ऐसे देखा जाए तो पुलिस प्रशासन पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होना तर्कसंगत है।इसी क्रम में संवाददाता को पता चला है कि अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी,आलोक कुमार
चतुर्वेदी कीअदालत ने दयाशंकर मिश्र बनाम अभिषेकआनंद एवंअन्य के सम्मन के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने मेंआरोपितों के विरुद्ध खड़ा रुखअपनाया है। अदालत में इस पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए डीआईजी,डीएम,एसपी, पुलिस प्रशासन एवंअन्य उच्चअधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है। अदालत के सूत्रों से मिली जानकारी केअनुसार सह आरोपित बगहा 1 के पूर्व अंचलअधिकारी,अभिषेक आनंद,अंचलअमीन,अनूप कुमारअनुपस्थित रहे।
एसडीजीएम चतुर्वेदी के न्यायालय ने बताया कि अनुपस्थितआरोपियों को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए कई बार सम्मन भेजा गया,अनुपस्थित आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंडसंहिता की धारा147/323/347/379/417/448/354बी/385/504/एवं 506 के तहत सम्मनआदेश जारी किया गया था,आरोपी ने इसआदेश के विरोध में, जिला एवंअपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में
चुनौती दी थी,लेकिन न्यायालय ने सम्मनआदेश को वैध मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय को भेज दिया था।इन सब के बावजूद भी न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सके।इस संबंध में सभी संबंधित उच्चअधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
न्यायालय नेआरोपियों की उपस्थिति के लिएअगली
तिथि 27अkगस्त 2026 निर्धारित की है।
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