अपनी मस्जिदों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण का केंद्र बनाएं - मौलाना हकीमुद्दीन कासमी
हाजीपुर, वैशाली, बिहार।
जमीयत उलेमा जिला वैशाली के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय संगठनात्मक एवं रचनात्मक दौरे के तीसरे एवं अंतिम दिन हाजीपुर शहर स्थित बारबेक्यू लाइव होटल में एक ऐतिहासिक एवं आदर्श प्रशिक्षण बैठक का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
बैठक का शुभारंभ सुबह 10 बजे हुआ, जिसमें जिले की 12 तहसीलों के अध्यक्षों, सचिवों तथा बड़ी संख्या में सक्रिय कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता मौलाना मोहम्मद नाज़िम कासमी (नाज़िम-ए-आला, जमीयत उलेमा बिहार) ने की। नेतृत्व मौलाना मोहम्मद एजाज़ अहमद (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा जिला वैशाली) तथा मार्गदर्शन मौलाना मोहम्मद आसिफ जमील कासमी (महासचिव, जमीयत उलेमा जिला वैशाली) ने किया। कार्यक्रम का संचालन मौलाना मोहम्मद शम्स तबरेज़ रहमानी (नाज़िम-ए-तंजीम, जमीयत उलेमा बिहार) ने किया।
बैठक के दौरान मौलाना मोहम्मद शम्स तबरेज़ रहमानी और मौलाना मोहम्मद सलमान कासमी ने संयुक्त रूप से जमीयत उलेमा के रचनात्मक कार्यक्रमों, विशेष रूप से दीनी तालीमी बोर्ड के अंतर्गत संचालित संगठित मकतब, आदर्श मस्जिद, शाखा जिम तथा शाखा रफ़ीक़ का डिजिटल प्रस्तुतीकरण किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना मोहम्मद नाज़िम कासमी ने संगठन की इकाइयों के गठन एवं उन्हें मजबूत बनाने पर बल देते हुए कहा कि संगठन के संदेश और योजनाएं तभी प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर तक पहुँच सकती हैं, जब उसकी मूल इकाइयाँ मजबूत हों। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की वास्तविक ताकत उसकी मजबूत बुनियादी संरचना होती है।
बैठक के दौरान 15 मिनट का विशेष विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित विद्वानों एवं पदाधिकारियों ने जमीयत उलेमा वैशाली की गतिविधियों और उपलब्धियों की सराहना की तथा भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मुख्य अतिथि मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में युवाओं और नई पीढ़ी की धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा:
> "धर्म परिवर्तन जैसी चुनौतियों से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम मकतब और मदरसे हैं। अपनी मस्जिदों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण का केंद्र बनाइए। स्कूल और कॉलेज जाने वाली बेटियों के दीन और ईमान की सुरक्षा की चिंता कीजिए। यह प्रयास वास्तव में ईमान की हिफाज़त का प्रयास है, ताकि हम जीवन भी ईमान के साथ बिताएँ और मृत्यु भी ईमान की अवस्था में हो।"
कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि की भावपूर्ण दुआ के साथ हुआ। अंत में मौलाना आसिफ जमील कासमी एवं हाफ़िज़ फ़सीहुद्दीन मदनी (नाज़िम, तंजीम एवं तरक्की, जमीयत उलेमा वैशाली) ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर मौलाना इज़हार कासमी (महासचिव, जमीयत उलेमा जिला पटना), मौलाना फ़िरोज़ आलम कासमी (राज्य कार्यालय सचिव), मौलाना आफ़ताब, मौलाना इमामुद्दीन नदवी, मौलाना ज़ुबैर कासमी, क़ारी हबीबुल्लाह, मौलाना अहबाब कासमी, मौलाना मुबारक कासमी, मौलाना तौसीफ़, हाफ़िज़ इकरामुल हक़, मुफ्ती शमीम कासमी, उर्दू एक्शन कमेटी वैशाली के अध्यक्ष अज़ीमुद्दीन अंसारी, हाफ़िज़ फैज़ान, मौलाना इज़हारुल हक़ कासमी, मौलाना बशीर अलक़मा कासमी, मौलाना शहाज़ कासमी, मौलाना अब्दुस्सुभान, इंजीनियर अज़हर हुसैन, मौलाना ज़फ़रुल हसन नदवी, डॉ. कलीम अशरफ़ (पत्रकार), डॉ. ज़ाकिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में उलेमा, इमाम एवं सामाजिक-धार्मिक हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
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