चेहल्लुम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से हुआ संपन्न।

शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
जिला में चेहल्लुम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ,इसके साथ ही यह पर्व हर्षउल्लास के माहौल  मनाया गया,किसी जगह से भी किसीअप्रिया घटना की सूचना नहीं है।शहर में पुलिस की चाकचौक बंद व्यवस्था,सभी चौकचौराहा पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती, संवेदनशील,अति संवेदनशी,एवं सभी पूजा स्थलों,मस्जिद,मंदिर,गुरुद्वापर पुलिस बल की तैनाती की गई थी।जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के द्वाराअखाड़ा नहीं निकलने, डीजे नहीं बजाने,लूकार नहीं भांजने की रोक लगाई गई थी।इसी कारणवश, सर्वजनिक जगह,मुख्य चौकचौराहों पर सेअखाड़ा नहीं गुजर सका।चेहल्लुम पर्व मनाने वाले लोग, अपने-अपने घरों,मैदानों, शांतिपूर्ण स्थान परअपना अपना कर्तव्य दिखाकर मनाया।कुछ लोगअपना मातमी जुलूसश्रद्धापूर्ण निकाले।इस तरह देखा जाए तो यह चेहल्लुम पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया।जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन ने भी चैन की सांस लिया।इस पर्व का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि देखा जाए तो यह चेहल्लुम का पर्व,इस्लाम धर्म का एक प्रमुख पर्व है,जो हजरत इमाम हुसैनऔर कर्बला के शहीदों की शहादत के 40वीं दिन मनाया जाता है यह मोहर्रम के ठीक 40  दिन बाद यानी सफर महीने की 20 तारीख कोआता है।शहादत की याद 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में पैगंबर मोहम्मद (स०अ०)  के नाती हजरत इमाम हुसैन नेअपने 72 साथियों के साथ सत्य,न्याय,अहिंसा के लिए जान दे दी थी। इस्लामी परंपरा में मृत्यु के 40 दिन पूरे होने पर शोक कीअवधि समाप्त होती है, दिवंगतआत्मा की याद में विशेष प्रार्थना की जाती है। 
इराक के कर्बला शहर  स्थित इमाम हुसैन के कब्र पर दुनिया भर से लोग जमा होते हैं,विशेष प्रार्थना की जाती है।शहादत के 40 दिन बाद कर्बला की जंग में शहीद हुए इमाम हुसैन, उनके साथियों की शोक, उनकी याद का 40 वाँ दिन पूरा होने परआता है। इस्लामी तारीख में यह इस्लामी कैलेंडर के दूसरे महीने यानी सफर की 20वीं तारीख को मनाया जाता है।इसका उद्देश्य अन्याय के खिलाफ लड़ना, सब्र रखना,इंसानियत की भलाई करना है। इस दिन लोग मजलिस करते हैं, कुरान पढ़ते हैं,जुलूस, निकालते हैं,सीना पीटते हैं।गरीब लोगों को खाना खिलाते हैं,दान पुण्य करते हैं।

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