नाटक बाबू विरांचीलाल ने खूब गुदगुदाया।
45 दिवसीय नाट्य कार्यशाला में 15 से अधिक नवागंतुक कलाकारों ने किया कार्य।
वसीम अकरम कुरैशी
जयपुर राजस्थान।।
कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार और रस रंग मंच संस्था के सहयोग से डॉ. चतुर्भुज लिखित हास्य व्यंग्य नाटक ‘बाबू विरंचीलाल’ का मंचन रवींद्र मंच पर किया गया। नाटक की परिकल्पना व निर्देशन हिमांशु झांकल एवं सह निर्देशन मुकेश वर्मा ने किया। 45 दिवसीय नाट्य कार्यशाला में इस नवीन नाटक को तैयार किया गया व 15 से अधिक नवागंतुक कलाकारों ने इस नाटक में मंच पर और मंच पार्श्व में कार्य किया।
नाटक में बाबू विरंचीलाल एक रिटायर्ड हैड क्लर्क हैं। उनके दो सपूत हैं। एक नेता बनना चाहता है, दूसरा अभिनेता, विरंचीलाल दोनों को सही मार्ग पर लाना चाहते हैं, पर ऐसा होता नहीं है। रोज-रोज के झगड़ों से तंग आकर बाबू विरंची लाल घर छोड़ कर चले जाते है, पीछे से उनकी दुर्घटना में मौत की खबर आती है और फिर उनकी लाश भी गायब हो जाती है। लाश को खूब ढूंढा जाता है, पर लाश नहीं मिलती। फिर अंत में विभिन्न घटनाक्रमों से निकलकर बाबू विरंची लाल जिंदा घर लौट कर आते हैं। अपने गायब होने और यमपुरी में यमराज से मिलने की कथा सुनाते है। हास्य और व्यंग्य से लबरेज नाटक हंसाने व गुदगुदाने के साथ ही जीवन में संघर्ष और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की सीख भी देकर गया। नाटक में इनकी रही विशेष भूमिका
नाटक में देवांग सैनी, काम्या गोयल, राजकेतन चौधरी, कान्हा वर्मा, वर्षा भाटी, रति महर्षि, पूजा यादव, लक्ष्य शर्मा, जसवंत नागर, यश प्रताप और अकबर अली ने विभिन्न भूमिकाएं निभाई।
नाटक में रूप सज्जा नरेंद्र बबल, मंच सामग्री राजकेतन, लक्ष्य, देवांग, जसवंत नागर और प्रकाश परिकल्पना अशोक बेनीवाल, विजेंद्र नरवाल की रही। वहीं फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी हितेश, वस्त्र विन्यास रति महर्षि, संगीत हिमांशु झांकल तथा उद्घोषणा की भूमिका सिकंदर अब्बास ने अदा की। इसी के साथ व्यवस्थापक रमन पारीक, प्रस्तुति प्रबंधक केके कोहली, जितेंद्र सिंह नरूका की रही तथा प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सुनील कुमार जैन ने निभाई।
Comments
Post a Comment