संत सौरभ की जीवनगाथा को प्रोफेसर डॉ. इवान गैचिना ने दिया अंतरराष्ट्रीय काव्य स्वर।
क्रोएशियाई लेखक ने संत डॉ. सौरभ पाण्डेय के जीवन, विचार और सार्वभौमिक सद्भाव को काव्यात्मक जीवनी में किया प्रस्तुत।
गोरखपुर।
गोरखपुर के संत सौहार्द शिरोमणि, जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ. सौरभ पाण्डेय के जीवन, विचार और सामाजिक सरोकार अब अंतरराष्ट्रीय साहित्य में भी स्थान बना रहे हैं। क्रोएशिया के साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. इवान गैचिना, अध्यक्ष, बाल्कनोफैंटास्टिका ने संत सौरभ के जीवन, दर्शन, सेवा कार्यों और विश्व सद्भाव की दृष्टि पर आधारित काव्यात्मक जीवनी ‘संत सौरभ: वॉयस ऑफ यूनिवर्सल हार्मनी’ की रचना की है।
एक भारतीय संत के जीवन और विचारों को विदेशी साहित्यकार द्वारा काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाना इस कृति की प्रमुख विशेषता है। प्रोफेसर गैचिना ने संत सौरभ की जीवन-यात्रा को केवल घटनाओं के रूप में प्रस्तुत न करके उनके विचारों, मानवीय संवेदनाओं, सेवा-भाव और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है।
पुस्तक में धरा धाम की परिकल्पना को विशेष स्थान दिया गया है। विभिन्न धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों के बीच संवाद, परस्पर सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व इस परिकल्पना के प्रमुख आधार हैं। इसका मूल भाव ‘वसुधैव कुटुम्बकम्—पूरा विश्व एक परिवार है’ के भारतीय दर्शन से जुड़ा है।
कृति में संत सौरभ के 1,200 से अधिक जन चौपाल कार्यक्रमों, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता, रक्तदान, देहदान जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और मानव सेवा से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक में संत सौरभ के पारिवारिक जीवन और सहयोग को भी स्थान मिला है। उनकी पत्नी डॉ. रागिनी पाण्डेय, पुत्री श्वेतिमा माधव प्रिया, पुत्र बाल भक्त सौराष्ट्र और पिता सोमनाथ पाण्डेय का उल्लेख किया गया है। उनके भाई अवनीश पाण्डेय, सविनय पाण्डेय और समीर पाण्डेय भी संत सौरभ के विचारों तथा सद्भाव, सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।
‘संत सौरभ: वॉयस ऑफ यूनिवर्सल हार्मनी’ गोरखपुर से शुरू हुई एक जीवन-यात्रा को अंतरराष्ट्रीय साहित्य तक पहुंचाने वाली कृति है। इसके माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक चिंतन, मानवीय मूल्यों और विश्व बंधुत्व की भावना को काव्य के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
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