गोपालपुर थाना कांड संख्या 191/190/26 के संबंध में पुलिस कीकार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह ?
बेतिया, बिहार।
गोपालपुर थाना क्षेत्र के कांड संख्या191/26 और 190/26 के संबंध में जो घटनाक्रम सामनेआया,वह बिल्कुल ही बबुनियादऔर सत्य से परे है,जैसा कि ग्रामीणों ने संवाददाता को बताया कि इस घटना को पूर्व से ही सुनियोजित पूर्वआग्रह से ग्रसित होकर विपक्षी को फसाने के नियत से उनके ही जायज जमीन परअपना नाजायज कब्जा करने के लिए षड्यंत्र रचा गया,इस जमीन का विवाद से
संबंधित स्थानीय न्यायालय में पूर्व से ही केस दर्ज है, इस जमीन को नाजायज तौर पर कब्जा करने के लिए,स्थानीय होने का नाजायज फायदा उठाकर, दबंगई दिखाते हुए, मुमताजआलम एवंअन्य के द्वारा एक षड्यंत्र रचकर, अपने विद्यालय का उपस्कर को तोड़ने,इसको नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र रचकरआवेदन संबंधित थाने को पूर्वी ही दिया गया था,ताकि विपक्षी पक्ष को इसके माध्यम से फंसाया जा सके,उनके जमीन पर नाजायज कब्जा कर लिया जाएगा, आईकॉन स्कूल के निदेशक,मुमताजआलम के द्वारा नाजायज तरीके से विद्यालय का रूप देकर, उपस्कर के साथअन्य को तोड़कर विपक्षी को फसाने के लिए पूर्व से ही षड्यंत्र रचा गया था,ताकि अपने आप को सुरक्षित रखकर विपक्षी को फसाने के लिए ऐसा पूर्व में ही थाने को आवेदन देकर एक साजिश रची गई थी, जिसे उस जमीन को नाजायज कब्जा करके बना लिया जाएगा,जब कि ग्रामीणों ने संवाददाता को बताया कि मुमताजआलम का विद्यालयअलग दूरी पर स्थित है।छरदवाली स्कूल में तोड़फोड़ के विवाद में नया मोड़ सामनेआया है। 29अगस्त को स्कूल में हुई कथित तोड़फोड़ के आरोपों को दूसरे पक्ष ने खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घायल जावेदआलम का आरोप है कि 25 अगस्त को उस पर फरसे से हमला किया गया,जिससे वह बुरी तरह घायल होकर मूर्छित, बेहोश होकर गिर पड़ा, बेहोश की स्थिति में ही उसकी स्थिति इतनी दैनिये हो गई थी कि वह मरने के कगार पर पहुंच गया था, अगर राजूअहमद एवं अन्य के द्वारा इसके इलाज में जल्दी नहीं की गई होती तो बुरी तरह घायल,बेहोश जावेदआलम का उस दिन जीवनलीला ही समाप्त हो जाती,अस्पताल में बेहोशी की स्थिति में उसके सिर में आठ टांके लगे,वह चनपटियाअस्पताल में प्राथमिक उपचार करने के बाद घायल जावेदआलम को बेतियाअस्पताल में भर्ती कराकर उसका इलाज कराया गया,जो तीन-चार दिनों तक अस्पताल के बेड पर पड़ा रहा,उसने ने सवाल उठाया है कि जब वह अस्पताल में उस समय घायल स्थिति में पड़ा हुआ था,इलाज चल रहा था,डॉक्टर की निगरानी में था,तो कैसे 29 अगस्त की रात स्कूल में हुई तोड़फोड़ में उसकी मौजूदगी संभव है।
वहीं राजूअहमद ने भी संवाददाता को बताया कि उनके ऊपर जो भीआरोप लगाए गए है,वह बिल्कुल बेबुनियाद,निराधार तथ्य से परे हैं,सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है,मनगढ़ंतआरोप है,आरोपों को गलत बताते हुए उन्होंने संवाददाता से बताया कि 25 अगस्त को वह अपने जमीन पर, कथितअवैध स्कूल निर्माण की शिकायत लेकर वह गोपालपुर थाने में मौजूद थे,घायल जावेदअलम, और राजूअहमद दोनों ने इस घटना से संबंधित, मोबाइल लोकेशन, मेडिकल रिपोर्ट,घर का दस्तावेज औरअन्य साक्ष्यों की जांच की प्रबल मांग की है,ताकि सच्चाई सभों के सामने आ सके,जांच हो सके,इस घटनाक्रम में, पुलिस की कार्यशैली, कार्यकुशलता,निष्पक्षता फर्द ब्यानऔर इंज्यूरी रिपोर्ट केआधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में भी शिथिलता एक पक्ष के हित में बरती गई है,जो न्याय संगत नहीं लगता,अब तो पुलिस जांच की प्रक्रिया में वस्तु स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।फिलहाल दोनों पक्षों केआरोपों की पुष्टि अब पुलिस की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। दूसरे की जमीन को नाजायज कब्जा करने वाले लोग इसी तरह का रूपअपनाकर,पूर्व से ही षड्यंत्र रचकर ऐसे काम को करते हैं,किसी की जमीन पर नाजायज कब्जा करने के लिए पूर्व से ही मनगढ़ंत साजिश कर यही तरीकाअपनाया जाता है,ऐसे लोगों की इमानदारी की गणना सत्य से परे ही होता है।केस के दौरान, ही न्यायालय में दोनों पक्षों के कागजात की सत्यता की जांच होगी,साथ ही दूध का दूध पानी का पानी हिसाब होगा।न्यायालय काआदेश दोनों पक्षों के लिए सर्वपरी होगा,इसके बाद झगड़ा ही खत्म हो जाएगा।जमीन की सच्चाई भी सामने आ जाएगी कि कौन सच्चा है,कौन ईमानदार है,कौन झूठा और बेईमान है।
गोपालपुर थाना कांड संख्या 191/26 के अनुसंधानकर्ता की अब पूरी जिम्मेवारी बनती है कि निष्पक्ष जांच का सहारा लेकर दोषी को सजा दिलाया जाए,साथ ही निर्दोष को इस केस की प्रक्रिया से मुक्ति दिलाई जाए ताकि न्याय मिल सके "न्याय मिलने में देरी,
न्याय से इनकार" वाली कहावत चरितार्थ होती है।
"Justice delayed, justice denied".
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