सार्वजनिक भूमि को अधिकारियों ने 35 वर्ष पूर्व बनाया पर्चा।

खुलासे के बाद ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, परवाना रद्द करने की लगाई गुहार। 
 रिपोर्ट:विनोद विरोधी

गया, बिहार।
कई पीढियां से चले आ रहे गांव की एक सार्वजनिक भूमि पर चुपके से 35 वर्ष पूर्व तत्कालीन अंचल अधिकारी द्वारा परवाना बना दिए जाने के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। मामला जिले के मोहनपुर प्रखंड के जमुहार गांव का है। परवाना निर्गत जमीन पर परवाना धारकों द्वारा कब्जा जमाने की कोशिश की जा रही है, जिसे स्थानीय लोगों ने विरोध जताया है।वहीं खून खराबा की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बिहार सरकार के खाता संख्या 170 में कुल 9.75 एकड़ जमीन अनावाद परती भूमि है,जिसका उपयोग पूरे गांव के लोग मवेशियों के ठहराव, बच्चों के खेलकूद, चौपाल ,शादी विवाह व त्यौहारों में इस्तेमाल लंबे अरसे से करते चले आ रहे हैं। वर्ष 1992 में तत्कालीन अंचलाधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी द्वारा चोरी चुपके से गांव के ही कई लोगों को विभिन्न टुकड़ों में पर्चा बना दिया गया है। इस दौरान उक्त परचाधारियों द्वारा कोई दखल कब्जा नहीं किया गया ।किंतु पिछले एक दो माह के अंदर परवानाधारियों के उत्तराधिकारी के द्वारा उक्त सार्वजनिक भूमि पर निजी कब्जे की कोशिश की जाने लगी,तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध जताया। इधर इस विवाद को निपटाने को लेकर विगत 6 सितंबर 2026 को सिंदुआर पंचायत स्थित ग्राम कचहरी द्वारा एक सार्वजनिक आम सभा का भी आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य उमेश पासवान, सरपंच शिव पासवान समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान उक्त भूमि को सार्वजनिक रखने तथा इसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाने की निर्णय लिया गया। इधर परवानाधारी द्वारा उक्त जमीन पर बलपूर्वक कब्जे की बात की जा रही है और रोकने वालों पर एससी एसटी एक्ट लगाकर झूठे मुकदमें में फंसाने की बात की जा रही है, जिससे तनाव बढ़ गया है और खून खराबी की घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस सिलसिले में स्थानीय लोगों ने वरीय अधिकारियों से ऐसे परवानों को रद्द करने की गुहार लगाई है।

Comments

Popular posts from this blog

The Robotics and AI Innovation Lab was inaugurated at Carmel Girls' Inter College.

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

जो सिफत बाप में होती है कमोबेश वही सिफत औलाद में पाई जाती है - मुफ्ती अकरम