शिक्षा-दान करनेवाला प्रत्येक व्यक्ति गुरु है - न्यायमूर्त्ति

वैशाली अंतर्राष्ट्रीय विद्यापीठ द्वारा सिमेज पटना के प्रांगण में आयोजित हुआ 'गुरु-सम्मान-समारोह'
पटना/हाजीपुर (वैशाली)बिहार।
परिभाषाएँ भले बदल गयी हों, किंतु शिक्षा का महान दान करने वाला प्रत्येक गुणी व्यक्ति 'गुरु' ही है। गुरुजन ही समाज के निर्माता होते हैं। उनका सम्मान ईश्वर का सम्मान है।
यह बातें मानवाधिकार टुडे एवं वैशाली अंतर्राष्ट्रीय विद्यापीठ द्वारा सिमेज, पटना के प्रांगण में आयोजित गुरु-सम्मान-समारोह-२०२६ का उद्घाटन करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्त्ति मांधाता सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञान परंपरा में किसी के भी अधिकार का हनन'पीड़ा देना' है , जिसे पाप कहा गया है। पुराणों का सार यह है कि 'परोपकाराय पुण्याय, पापाय परपीड़नम"। यही ज्ञान और मानवाधिकार की रक्षा का सूत्र है।
समारोह के मुख्यअतिथि और सुप्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो के सी सिंहा ने कहा कि भारत इसलिए विश्व गुरु था कि हम शिक्षा-दान करने में सक्षम थे। यहाँ नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय थे। दुनिया भर से विद्यार्थी यहाँ ज्ञानार्जन के लिए आते थे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक समाज का निर्माण भी कर सकता है और विनाश भी। इसलिए शिक्षकों का महत्त्व सदैव रहा है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि जब समाज में पतन दिखायी दे, तो समझना चाहिए कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में दोष आया है। हम उपदेशक तो हो गए हैं, पर हमारे आचरण शुद्ध नहीं है। शिक्षकों के प्रति आज के विद्यार्थियों में अश्रद्धा अकारण नहीं है। हमें सचेत और सतर्क हो जाना चाहिए। यदि हम भारत को पुनः विश्व-गुरु के रूप में देखना चाहते हैं, तो हमें अपने ऋषि-आचार्यों की तरह साधना और आचरण को जीवन में उतारना होगा।
पद्मश्री जितेंद्र कुमार सिंह, पद्मश्री विमल जैन, पद्मश्री अशोक विश्वास, सिमेज के निदेशक नीरज अग्रवाल, डा तारकेश्वर पण्डित, डा जंगबहादुर पाण्डेय, डा सुमेधा पाठक, डा रेणु कुमारी, डा कमल किशोर बौद्ध, डा मधु प्रभा सिंह, तथा अमित कुमार विश्वास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत  विद्यापीठ के संस्थापक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डा शशि भूषण कुमार ने किया। धन्यवाद-ज्ञापन अल्काश्री ने तथा मंच का शानदार संचालन   विख्यात उद्घोषक और Voice of Vaishali- कौसर परवेज़ खान ने किया।इस अवसर पर लेखक डॉ चंद्रजीत वर्मा द्वारा लिखी गई पुस्तक "पूर्वांचल की माटी" का भी लोकार्पण किया गया
इस अवसर पर, बिहार और झारखण्ड के १०१ शिक्षक-शिक्षिकाओं को गुरु-सम्मान-२०२६ से विभूषित किया गया।

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