एम कोटियावी राही की पुण्यतिथि पर साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन।
*राही गुज़र गया रास्ते उदास है*
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
जाने-माने उर्दू कहानीकार, कवि, पत्रकार और साहित्यकार एम.कोठियावी राही की पुण्यतिथि के मौके पर, गोरखपुर की मशहूर साहित्यिक संस्था 'साजिद अली मेमोरियल कमिटी' की ओर से एक "स्मृति सभा एवं साहित्यिक गोष्ठी" आयोजित की गई। यह कार्यक्रम शहर के घासी कटरा स्थित "मोहम्मद हामिद अली हॉल" (आगोश-ए-हमीदिया) में हुआ।
इस कार्यक्रम के दौरान मशहूर पत्रकार और कवि ज़मीर अहमद पयाम को 'जौहर मगरी अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। ज़मीर अहमद पयाम ने कहा कि राही एक बेहतरीन कहानीकार थे और साहित्य की दुनिया में उनकी शायरी का एक खास मुकाम था; हालाँकि राही वैचारिक रूप से 'प्रगतिशील आंदोलन' से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह से नहीं अपनाया था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने राही को समर्पित एक विशेष पत्रिका प्रकाशित की थी।
इस मौक़े पर बोलते हुए, साजिद अली मेमोरियल कमिटी के सेक्रेटरी और एम. कोठियावी राही के क़रीबी साथी महबूब सईद हारिस ने कहा कि गोरखपुर के साहित्यिक जगत ने कई साहित्यकार दिए हैं, लेकिन एम. कोठियावी राही के क़द के बहुत कम लोग ही हुए हैं। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था, यह तय करना मुश्किल था कि वे मुख्य रूप से एक महान कहानीकार, कवि, पत्रकार या प्रतिष्ठित साहित्यकार थे, क्योंकि वे हर क्षेत्र में माहिर थे और सचमुच बेजोड़ थे।
महबूब सईद हारिस ने बताया कि राही—जो आज़मगढ़ के कोरियापार के रहने वाले थे, और यह जगह शिबली नोमानी और कैफ़ी आज़मी की जन्मभूमि भी है। उनका जन्म 1939 में हुआ था और वे लगभग ग्यारह या बारह साल की उम्र में अपनी माँ के साथ गोरखपुर चले गए थे। उन्होंने बताया कि राही साहब के उनके पिता मुहम्मद हामिद अली के साथ बहुत क़रीबी रिश्ते थे और मेरे वालिद, राही साहब को भाई की तरह मानते थे।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जमीर अहमद पाय को जौहर मगहरी अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर मुहम्मद फर्रुख जमाल ने कहा कि दबिस्तान-ए-गोरखपुर के साहित्य जगत में एम. कोठियावी राही का नाम बहुत ख़ास और सम्मानित है। उन्होंने अपने ख़ून-ए-जिगर से साहित्य की जो शमा जलाई थी, वह हमेशा जलती और चमकती रहेगी। उन्होंने एम.कोठियावी राही को एक तपस्वी स्वभाव का व्यक्ति—एक सच्चा 'फ़कीर' बताया ।जिन्होंने जीवन की उतार-चढ़ाव भरी लहरों का डटकर सामना किया, लेकिन कभी भी राही साहब के होंठों से कोई शिकायत या शिकवा नहीं निकला। वे हमेशा खुशमिजाज होकर लोगों से मिलते थे और युवा पीढ़ी को स्नेह की नज़र से देखते थे। ऐसी शख्सियत का जाना निस्संदेह साहित्य की दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।
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प्रायोजित नतीजा
एम. कोठियावी राही को श्रद्धांजलि देते हुए, श्री काज़ी कलीम-उल-हक़ ने राही साहब के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते का ज़िक्र किया; उन्होंने राही साहब की किताब का कवर डिज़ाइन किया था और हमेशा उनका हौसला बढ़ाया था।
अब्दुल बाक़ी हासिल ने बताया कि एम. कोथियावी राही की पहली लघु कथा बातचीत पर आधारित कहानी थी; यह एक पत्रिका में छपी थी और पाठकों ने इसे बहुत पसंद किया था।
मोहम्मद इफराहीम ,ज़मीर अहमद प्याम डॉक्टर अज़ीज़ रिज़वी, मोहम्मद कामिल ख़ान ,मोहम्मद अनवर ज़िया, डॉ मोहम्मद अशरफ, ज़का इब्ने वाहीद,आसिफ सईद, क़ाज़ी कालीमुल हक़, शमीम शहज़ाद, अब्दुल बाक़ी ख़ान हासिल, सैयद वलीउ इकबाल, इंजीनियर मिनतुल्लाह, फरहान काजमी आदि उपस्थित रहे।
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