बेतिया में शिक्षक दिवस हर्षउल्लास,रंगारंग,भव्य कार्यक्रमो से हुआ संपन्न, गिफ्ट का दौर जारी।
बेतिया, बिहार।
जिला में शिक्षक दिवस कार्यक्रम पूर्व के वर्षों के भांती इस वर्ष भी बड़े ही हर्षउल्लास,रंगारंग एवं भव्य कार्यक्रम के बीच संपन्न हुआ।जिले के सभी सरकारी,निजी स्कूल के साथ साथ सभी कोचिंग संस्थानों में इस कार्यक्रम काआयोजन किया गया।
इन विद्यालयों में छात्र, छात्राओं के द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम,जैसे सांस्कृतिक,नृत्य,ड्रामा,भाभाषण,शिक्षा पर आधारितआधुनिक डांस, नाटक,फैंसी ड्रेस कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्र-छात्राएं, शिक्षक,माता-पिता, अभिभावक,छोटे-छोटे बच्चे,मोहल्लेवासी, छात्र-छात्राओं के सगे संबंधी,इष्टमित्रों की अपार भीड़ कार्यक्रम को देखने हेतु लगी हुई थी।कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने छात्र/छात्राओं/छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा प्रस्तुत किए गएअनेकों स्तर के विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को देखकर छात्र-छात्राओं के माता पिता,अभिभावक,सगे संबंधी,इष्टमित्र एवं अन्य मंत्रमुग्ध्य हो गए,साथ ही तालिया की गगनचुंबी गड़गड़ाहट से पूरा विद्यालय परिसर गुंजता रहा।शिक्षक दिवस के इस अवसर पर,संवाददाता ने भी जिले में भ्रमण कर कार्यक्रमों पर नजर बनाए
रखते हुएअपना मंतव्य देते हुए कहा है कि "आधुनिक शिक्षा के संबंध में कुछ जानकारी देना कठिन लगता है,क्योंकि इसके पूर्व के दुनिया में शिक्षक था ही नहीं,बल्कि गुरु थे,वे शिक्षक से बहुत भिन्न थे।
शिक्षा देना उनका धंधा नहीं था,बल्कि उनका आनंद था।शिक्षण कार्य पहली दफा धंधा बना है,
शिक्षण कार्य धंधा बनते ही
शिक्षक,गुरु होने की हैसियत को खो देता है।
शिक्षण कार्य विद्यालय, कोचिंग संस्थानों में समाहित होकर रह गया है,
जो एक फैक्ट्री,कारखाना, पैसा कमाने का जरिया बन गया है।इतना ही नहीं,इस आधुनिक,डिजिटलाइज्ड, भ्रष्टयुग में शिक्षा,शिक्षण संस्थान,कोचिंग संस्थान
काअर्थ ही बदल गया है, या यूं कहा जाए कि आर्थिक शोषण के साथ साथ कामधेनु गाय बना लिया गया है,जिस उद्देश्य के तहत भारत के राष्ट्रपति, शिक्षाविद,डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की
जयंती के रूप में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, जिसकी परिकल्पना,गुरु: ब्रह्मा,गुरुविष्णु,गुरुदेव महेश्वर:,गुरु:साक्षात पर ब्रह्म तस्मै:श्री गुरुवे नमः केआधार पर शिक्षक दिवस मनाने की परिकल्पना थी।गुरु काआर्थिक शब्द बच्चों को सम्मान,शिक्षा देना,उनके आत्मविश्वास को जागृत करना,संस्कृति पैदा करना,
बड़े छोटों,अमीर गरीब, काला गोरा,ऊंच नीच में
अंतर समझना,बड़ों की प्रतिष्ठा करना इत्यादि सैकड़ो बातों को समझा बूझकर उसे पर गतिमान करने की सबक सिखाएं।
दूसरी और कुछ बातें ऐसी हैं,जिनका ध्यान में रखकर
शिक्षक,शिक्षण कार्य करने वाले को ध्यान में रखना होगा,वह या है कि "गुरु शब्द वह शब्द है जो किसी कीआत्मा को जगा दे, किसी के व्यक्तित्व को निखार दे,उसके बंद फूल खिल जाए,साथ ही शिक्षक वह है,जो पुरानी पीढ़ियों के द्वाराअर्जित सूचनाओं को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करे,विदा हो जाए,वह महज मध्यस्थ है"।
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