नौजवानों को दीनी तालीम और बेहतर किरदार की जरूरत - मुफ्ती अख्तर हुसैन

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी संगोष्ठी
सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में मौजूदा दौर के चैलेंजेस और नौजवानों को पेश आने वाली विभिन्न चुनौतियों को लेकर एक दीनी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बदलते सामाजिक माहौल, आधुनिक दौर की चुनौतियों और नौजवानों की जिम्मेदारियों पर रोशनी डालते हुए उन्हें कुरआन और सुन्नत की शिक्षाओं से जुड़कर अपनी जिंदगी बेहतर बनाने की अपील की।
मुख्य वक्ता मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि इस्लाम इंसान को हर दौर की परिस्थितियों में संतुलित और जिम्मेदार जिंदगी जीने की शिक्षा देता है। नौजवान अगर अपनी जिंदगी में कुरआन-ए-पाक की शिक्षाओं, पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और नेक लोगों की जिंदगी को मार्गदर्शक बनाए रखें तो वे कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों और समाज के जिम्मेदार लोगों से भी अपील की कि वे नौजवानों की सही रहनुमाई करें और उनकी समस्याओं को समझते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करें। परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर नौजवानों की बेहतर तरबियत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नौजवानों में आत्मविश्वास, अनुशासन, जिम्मेदारी और इंसानियत की भावना पैदा करना समय की अहम जरूरत है। उन्हें नशे, बुरी संगत, गलत सामग्री और निराशाजनक सोच से बचाने के साथ-साथ सकारात्मक गतिविधियों, शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जोड़ना चाहिए। सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में सावधानी बरतने पर भी जोर दिया। 
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि नौजवान किसी भी समाज और कौम की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उनके सामने आज शिक्षा, रोजगार, सोशल मीडिया, बदलती जीवनशैली और सामाजिक दबाव जैसी अनेक चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे माहौल में सिर्फ आधुनिक जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके साथ सही सोच, मजबूत किरदार और नैतिक मूल्यों का होना भी जरूरी है। तकनीक अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल उसे अच्छा या बुरा बनाता है। इसलिए नौजवानों को अपने समय और क्षमताओं का सही इस्तेमाल करते हुए शिक्षा, समाज और मानव सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।
संगोष्ठी की शुरुआत हाफिज रहमत अली निजामी ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से की। संगोष्ठी में हाजी फैज खान, मो. जीशान, मो. जैद, हाजी बदरुल हसन, सैयद जव्वाद अली, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ, मो. आरिफ, मो. हसन, रोशन, कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, अफसर समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अंत में देश और समाज में अमन, भाईचारे, खुशहाली तथा नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की गई।
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