मोहब्बत-ए-रसूल से रोशन हुआ इस्माइलपुर, जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी में गूंजे नात-ए-पाक के स्वर।

काजी जी के मैदान में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, उलमा ने इश्क-ए-रसूल को बताया ईमान की पहचान। 
सैय्यद फरहान अहमद 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 
इस्माइलपुर स्थित काजी जी के मैदान में जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन किया गया। जलसे में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। माहौल नात-ए-पाक, सलाम और मोहब्बत-ए-रसूल के जज्बे से सराबोर नजर आया। वक्ताओं ने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत, अखलाक और इंसानियत के लिए उनके पैगाम को अपनी जिंदगी में उतारने की अपील की।
जलसे का आगाज कुरआन-ए-पाक की तिलावत से कारी शरफुद्दीन मिस्बाही ने किया। कारी नसीमुल्लाह, मौलाना अली अहमद, हाफिज मिन्हाजुद्दीन और हाफिज इरफान ने बारगाह-ए-रिसालत में नात का नजराना पेश किया। 
मुख्य अतिथि तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन डॉ. मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने मोहब्बत-ए-रसूल के विषय पर विस्तार से तकरीर की। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी पूरी इंसानियत के लिए रहमत, अमन, भाईचारे और बेहतर चरित्र का आदर्श है। सच्ची मोहब्बत-ए-रसूल  केवल जुबान से इजहार करने का नाम नहीं, बल्कि आपकी सुन्नत और सीरत को अपनी जिंदगी में अपनाने का नाम है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और समाज में आपसी भाईचारा, इंसानियत, सद्भाव और नेक आचरण को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी में तौहीद, सच्चाई, ईमानदारी, सब्र, रहमदिली, पड़ोसियों के हक और जरूरतमंदों की मदद जैसी महान शिक्षाएं मौजूद हैं। इन शिक्षाओं को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने इश्क-ए-रसूल की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मुसलमान की जिंदगी में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत को केंद्रीय स्थान हासिल है। आपकी सीरत पर अमल करके इंसान अपने किरदार को बेहतर बना सकता है और समाज में अमन व भाईचारे की मजबूत बुनियाद रख सकता है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का अध्ययन करने और उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की।
संचालन हाफिज रहमत अली निजामी ने किया। उन्होंने अपने प्रभावी अंदाज में जलसे की विभिन्न गतिविधियों को आगे बढ़ाया और उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया। जलसे के दौरान बारगाह-ए-रिसालत में दुरूद-ओ-सलाम का नजराना भी पेश किया गया और मुल्क में अमन, खुशहाली तथा आपसी भाईचारे के लिए दुआ की गई।
जलसे में हाफिज मो. मोहसिन कादरी, हाफिज फुरकान, हाफिज काशिफ अली, हाफिज अमन, हाफिज जैद, हाफिज अरीब, शारिक, हाफिज मो. मिन्हाजुद्दीन, मिट्ठू, इबरत, अकरम, शाबान खान, सादिक कलीम, गोलू, मौलाना अबुल कलाम, कारी अनस नक्शबंदी, मो. इरफान, गुलाम शरफुद्दीन सामानी, शारिब, गुफरान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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