शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
इन दिनों शहरी क्षेत्र के बैंकों में ग्राहकों को पैसा निकासी,जमा करने में बाहरी हस्तक्षेप का सामना करना पड़ रहा है।
शहरी क्षेत्र के बैंकों में अनेकों प्रकार के लोग अपने विभिन्न विभिन्न कामों के लिए जमा हो जाते हैं,कुछ लोग तो वास्तविक रूप से बैंकों में रूपयों की जमा,निकासी, ड्राफ्ट बनवाने,चेक कैश कराने,जमा करने,विड्रॉल करने,पासबुकअपडेट करने,वृद्धा पेंशन एवं अन्य पेंशन राशि के बारे में पता लगाने के लिए बैंकों में रहते हैं,जिससे बैंकों में भारी मात्रा में रूपयों की निकासी,जमा करने में भारी भीड़ लगी रहती है, लोगों पंक्तिबद्ध खड़ा होकरअपनी पारी का इंतजार करते हैं,कई कई लोग लाखों लाख रुपया जमा,निकासी करने हेतु  बैंकों में रहते हैं,इसमें काफी लंबा समय भी लगता है।इसकेअलावा बैंकों में जमा,निकासी, पासबुकअपटूडेट करने विधवा,वृद्ध,विकलांग पेंशन राशि पता लगाने के लिए भी भीड़ इकट्ठा रहती है,बैंकों में ड्यूटी पर तैनात गार्ड दिन भर चुस्त दुरुस्त रखकरअपनी ड्यूटी निभाया करते हैं,साथ ही साथ बैंकों में आने जाने वाले लोगों पर पैनी नजर रखते हैं,फिर भी कई तरह  की घटनाएं हो जाती हैं।बैंकों केअंदर पॉकेटमार, चोर उचक्का, असामाजिक तत्व भीलोगों की रुपए की निकासी पर ध्यान लगाए रहते हैं।कई बार बैंकों में ही लोगों के पॉकेट कट जाते हैं,राशि निकासी करने के बाद लोगअपने बैग में पैसा लेकर बैंक से बाहर निकलते हैं,गाड़ी के डिक्की में पैसा रखते हैं, जिस पर चोरउचक्का, आसामाजिक तत्व  पहली नजर बनाए रखते हैं, जहां-जहां पैसा निकाल कर जाने वाले लोगों को पीछा करते हैं,लोगों का रूपयों से भरा बैग को झपटकर फरार हो जाते हैं 
इसके साथ ही बाइक की डिक्की में पैसा रखकर जाने वाले लोगों पर भी अपनी नजर गड़ाए रहते हैं,
मौका मिलते ही डिक्की तोड़कर पैसा निकाल कर चम्पत हो जाते हैं।पीड़ित लोगों के द्वारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है,मगर ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है,बाइक की डिक्की तोड़कर पैसा गायब होने के बाद पैसा मिलना बहुत कठिन समस्या बन जाता है इसलिए जिला,नगर पुलिस प्रशासन विभिन्न थाना क्षेत्र मेंअपराध नियंत्रण के दृष्टिकोण से बैंकों की चेकिंग करती रहती है।

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