हजरत अली बहादुर की बारगाह से मिला मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम, कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन।
रहमतनगर स्थित दरगाह पर हजरत मुहम्मद अली बहादुर शाह अलैहिर्रहमा के तीन दिवसीय 110वें उर्स-ए-पाक का बुधवार को कुल शरीफ, दुआख्वानी और फातिहाख्वानी के साथ शांतिपूर्ण माहौल में समापन हुआ। उर्स के अंतिम दिन बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंचे और अपनी अकीदत का इजहार करते हुए मुल्क और कौम की तरक्की, अमन-ओ-अमान तथा खुशहाली के लिए दुआ मांगी। इस अवसर पर जायरीनों और अकीदतमंदों के लिए लंगर का भी इंतजाम किया गया।
उर्स के दौरान दरगाह पर दिनभर रूहानी माहौल बना रहा। अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाजिरी देकर फातिहा पढ़ी और बुजुर्गों की तालीमात पर अमल करने का संकल्प लिया। अंतिम दिन आयोजित कुल शरीफ में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इसके बाद दुआख्वानी हुई, जिसमें देश में शांति, आपसी भाईचारा, खुशहाली और तरक्की के साथ समाज में मोहब्बत और इंसानियत की भावना मजबूत होने की दुआ की गई।
उर्स के समापन अवसर पर लोगों को नेक जिंदगी गुजारने, शरीअत के मुताबिक जिंदगी बिताने और अपने फराइज को समय पर अदा करने की नसीहत की गई। वक्ताओं ने कहा कि इंसान को अपने आचरण और व्यवहार से समाज में अच्छाई फैलाने की कोशिश करनी चाहिए। सुन्नतों से जुड़ना, बुराइयों और गलत कामों से बचना तथा अपने आसपास रहने वाले लोगों के साथ प्रेम, सम्मान और सद्भाव का व्यवहार करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
इस मौके पर खास तौर पर पड़ोसियों, रिश्तेदारों और समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ अच्छे व्यवहार और मोहब्बत से पेश आने का संदेश दिया गया। कहा गया कि आपसी भाईचारा, एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना और जरूरतमंदों की मदद करना समाज को मजबूत बनाता है। बुजुर्गों की शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में अपनाकर इंसान न सिर्फ अपने जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक वातावरण पैदा कर सकता है।
कुल शरीफ के बाद दुरूद व सलाम पढ़ा गया। इसके पश्चात मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारा, खुशहाली, तरक्की और आपसी सौहार्द कायम रहने के लिए विशेष दुआ की गई। दुआ के दौरान अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर मुल्क और समाज की बेहतरी की कामना की।
उर्स के दौरान दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की आवाजाही बनी रही। लंगर में लोगों ने शिरकत की और एक-दूसरे के साथ मिलकर भोजन किया। आयोजकों की ओर से उर्स में शामिल होने वाले सभी अकीदतमंदों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी बुजुर्गों की शिक्षाओं और मोहब्बत व भाईचारे के पैगाम को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
उर्स में अली गजनफर शाह, मुहम्मद जैद, मौलाना अली अहमद, मुहम्मद अमान, जैद मुस्तफाई, सैफी, शहजादे कुरैशी, बब्लू कुरैशी, रेहान कुरैशी, यासीन, अली नुसरत शाह, अली अशहर शाह, अली जफर शाह, अली मुजफ्फर शाह सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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