सुमय्या एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट ने 60 छात्र-छात्राओं को दी छात्रवृत्ति।

शिक्षा और संस्कार को बताया उज्ज्वल भविष्य की कुंजी। 
सेराज अहमद कुरैशी 
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
शिक्षा को बढ़ावा देने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने तथा समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सुमय्या एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट, गोरखपुर की जानिब से आईएमआरसी के सहयोग से छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम चिल्ड्रेन फ्यूचर एकेडमी, इलाहीबाग के हॉल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कक्षा छह से लेकर स्नातक (ग्रेजुएशन) तक की पढ़ाई कर रहे कुल 60 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और जरूरतमंदों की सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरान पाक से हुई। पवित्र कुरान की तिलावत के साथ ही कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिकता, सद्भाव और सकारात्मक विचारों से ओतप्रोत हो गया। उपस्थित अतिथियों ने शिक्षा को समाज की तरक्की का सबसे मजबूत आधार बताते हुए जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद को एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वांचल दस्तक के संरक्षक काजी कलीमुल हक ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन सुमय्या एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. एम. आजम बेग ने किया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग, समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ट्रस्ट की पहल की सराहना की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्षता कर रहे काजी कलीमुल हक ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति, जागरूकता और आत्मनिर्भरता का मूल आधार है। समाज तभी आगे बढ़ सकता है, जब उसके बच्चे शिक्षित हों और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए समान अवसर प्राप्त हों। आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। छात्रवृत्ति जैसी पहल विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करती है और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे आचरण से परिवार, समाज तथा देश के विकास में योगदान देना चाहिए। जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करना है।
शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए हाफिज फारूख जिशान ने बच्चों को दीन और दुनिया में कामयाबी हासिल करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करती है। ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, समय का सदुपयोग करने, अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने तथा अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व को निखारे, उनके भीतर इंसानियत पैदा करे और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाए। दीन की अच्छी शिक्षाएं और दुनियावी ज्ञान, दोनों ही व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने की राह दिखाते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें, उनकी समस्याओं को समझें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
डॉ. रिजवानुल हक फलाही ने अपने संबोधन में शिक्षा और संस्कार के बीच के गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त कर लेना ही किसी व्यक्ति को अच्छा इंसान बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके भीतर अच्छे संस्कार, विनम्रता, ईमानदारी, अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है, जो मनुष्य को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ संवेदनशील, जिम्मेदार और चरित्रवान भी बनाए। यदि कोई व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी दूसरों के प्रति सम्मान और सहानुभूति नहीं रखता, तो उसकी शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने माता-पिता, शिक्षकों, बुजुर्गों और समाज के सभी लोगों का सम्मान करें। जरूरतमंदों की मदद करें, सच्चाई का साथ दें और अपने व्यवहार से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही एक बेहतर परिवार, सभ्य समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण करता है।
कार्यक्रम के दौरान कक्षा छह से ग्रेजुएशन तक के 60 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग देना तथा आर्थिक कठिनाइयों के कारण शिक्षा से वंचित होने की आशंका को कम करना है।
छात्रवृत्ति विद्यार्थियों के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके सपनों को साकार करने की दिशा में एक प्रोत्साहन भी है। इससे बच्चों में मेहनत करने, बेहतर परिणाम प्राप्त करने और अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज के सक्षम लोगों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें पढ़ाई के लिए सहायता की आवश्यकता है। जरूरतमंद बच्चों की समय पर मदद करना सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में सार्थक कदम है।
सुमय्या एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट शिक्षा के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद और कमजोर वर्गों की सहायता के लिए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में योगदान देता है। संगठन की प्रमुख गतिविधियों में जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करना, सर्दियों में जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण, रमजान के पवित्र महीने में इफ्तार किट उपलब्ध कराना तथा आकस्मिक बीमारी और इलाज की स्थिति में आर्थिक सहायता देना शामिल है।
ट्रस्ट की इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज में सहयोग, संवेदना और इंसानियत की भावना को मजबूत करना है। शिक्षा के क्षेत्र में सहायता देने के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों की बुनियादी कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास भी सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सर्दियों में कंबल वितरण जरूरतमंदों को ठंड से राहत पहुंचाने का माध्यम है, जबकि रमजान में इफ्तार किट उपलब्ध कराना जरूरतमंद परिवारों के प्रति संवेदनशीलता और भाईचारे का संदेश देता है। इसी प्रकार आकस्मिक इलाज में आर्थिक सहायता किसी संकटग्रस्त परिवार को कठिन समय में सहारा प्रदान करने का प्रयास है।
इन कार्यों के माध्यम से ट्रस्ट यह संदेश देता है कि समाज सेवा केवल किसी एक अवसर पर किया जाने वाला कार्य नहीं, बल्कि निरंतर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की सहायता जैसे क्षेत्रों में सामूहिक प्रयास ही समाज को अधिक संवेदनशील और सशक्त बना सकते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिक्षा तथा जनसेवा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करने और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।सुमय्या एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट, गोरखपुर की ओर से आयोजित यह छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम शिक्षा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय का प्रेरणादायक उदाहरण बना। 60 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करके यह संदेश दिया गया कि बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों को अधूरा न छोड़े। समाज के जिम्मेदार नागरिक, सामाजिक संस्थाएं और शिक्षण संस्थान मिलकर ऐसे प्रयास करें, जिससे हर बच्चे को सीखने, आगे बढ़ने और अपने जीवन में सफलता हासिल करने का अवसर मिल सके। शिक्षा से ज्ञान, संस्कार से चरित्र और सेवा से इंसानियत का विकास होता है। जब ये तीनों एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी एक शिक्षित, संवेदनशील और सशक्त समाज का निर्माण संभव होता है। 
इस अवसर पर इंजीनियर शाह आलम, जफर अहमद, मानवाधिकार संगठन एवं सेवा ट्रस्ट के संरक्षक हाजी इरशाद अहमद, डॉ. गुलाम शाकिर, डॉ. हामिद, इसहाक अहमद और परवेज सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने छात्रवृत्ति वितरण जैसी पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना समाज के भविष्य में निवेश करने के समान है।
मानवाधिकार संगठन एवं सेवा ट्रस्ट के संरक्षक हाजी इरशाद अहमद की उपस्थिति ने कार्यक्रम के सामाजिक सरोकारों को और मजबूती प्रदान की। समाज में जरूरतमंदों की सहायता, मानवीय गरिमा की रक्षा और कमजोर वर्गों तक सहयोग पहुंचाने के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
इसी क्रम में इंजीनियर शाह आलम, जफर अहमद, डॉ. गुलाम शाकिर, डॉ. हामिद, इसहाक अहमद और परवेज सहित उपस्थित अतिथियों की सहभागिता को शिक्षा और सामाजिक सेवा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक माना गया। सभी की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि समाज के विकास के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में सचिव शारिक अख्तर और शुजाअत हुसैन ने छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, सहयोगियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज सेवा के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए सभी का सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होकर बच्चों का उत्साहवर्धन करने वाले अतिथियों का विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी समाज के सहयोग से जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता और अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।

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