एम. ए. एकेडमी में विज्ञान कौशल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन।
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए विज्ञान, तकनीक और रचनात्मकता के आकर्षक मॉडल।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, व्यावहारिक कौशल और आत्मविश्वास विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत एम. ए. एकेडमी, तुर्कमानपुर, गोरखपुर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर विज्ञान कौशल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, कल्पनाशीलता और तकनीकी समझ का शानदार प्रदर्शन करते हुए अतिथियों एवं अभिभावकों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं तकनीकी मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने गोरखपुर के प्रसिद्ध इमामबाड़ा, गोरखनाथ मंदिर, हावड़ा ब्रिज, विभिन्न प्रकार के बांध, कुतुब मीनार, ताजमहल, लाल किला, जलप्रपात, रोबोटिक पार्क, ज्वालामुखी, इग्लू, रॉकेट, हाथ से बनाई गई घड़ी, बुके, फ्लावर पॉट सहित अनेक आकर्षक प्रारूप प्रस्तुत किए। इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा तैयार मिसाइल का सफल परीक्षण भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक समझ, मेहनत, कल्पनाशक्ति और प्रयोगात्मक ज्ञान का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमायरा आकिब द्वारा पवित्र कुरान की तिलावत से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया और विद्यार्थियों की ओर से तैयार विज्ञान एवं कौशल आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन कराया गया। अतिथियों ने बच्चों के मॉडलों को देखा, उनकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली तथा विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर शहर के काजी मौलाना मुफ्ती मतिउर रहमान कासमी ने अपने संबोधन में शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने अंदर नई चीजें सीखने, सवाल पूछने और प्रयोग करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रदर्शनी बच्चों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर प्रदान करती है। जब विद्यार्थी स्वयं किसी मॉडल का निर्माण करते हैं, तो वे केवल जानकारी प्राप्त नहीं करते, बल्कि उस विषय को समझने और व्यवहार में लागू करने का प्रयास भी करते हैं। ऐसी गतिविधियां बच्चों के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ उनमें आत्मविश्वास, मेहनत और जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी दुआओं से नवाजते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मानद कुलपति एवं धरा धाम इंटरनेशनल के प्रमुख सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पांडेय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में विद्यार्थियों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियां अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रदर्शनी विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाओं को वास्तविक स्वरूप देने का अवसर देती है। जब बच्चे स्वयं किसी मॉडल को तैयार करते हैं और उसके बारे में लोगों को बताते हैं, तो उनकी तार्किक क्षमता, प्रस्तुतीकरण कौशल, संवाद क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ऐसे आयोजन बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. पांडेय ने एम. ए. एकेडमी के विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि विद्यालय के बच्चे भविष्य में इससे भी बेहतर प्रस्तुतियां देकर शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित अतिथि एवं राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोस्वामी गौरव भारती ने कहा कि डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का संपूर्ण जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विज्ञान, तकनीक और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने योगदान से देश को नई पहचान दिलाई तथा युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मिसाइल मॉडल का परीक्षण और विज्ञान आधारित परियोजनाओं की प्रस्तुति डॉ. कलाम के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि का प्रतीक है। इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है और वे भविष्य में वैज्ञानिक, इंजीनियर, शोधकर्ता तथा नवाचारकर्ता बनने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में विज्ञान प्रदर्शनी का नियमित आयोजन होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, नए प्रयोग करने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि एवं गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी डॉ. दीनानाथ ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विज्ञान प्रदर्शनी, मॉडल निर्माण और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है, तो उनके भीतर छिपी क्षमताएं सामने आती हैं। विज्ञान प्रदर्शनी विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना, समस्याओं के समाधान तलाशना और सामूहिक रूप से कार्य करना सिखाती है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में अपने चुने हुए क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
गोरखपुर के वरिष्ठ आर्थ्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजीत कुमार चौधरी ने भी विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर सीखने, मेहनत करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने चिकित्सा सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नई खोजों और आधुनिक तकनीकों के विकास में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच तथा प्रयोग करने की प्रवृत्ति की अहम भूमिका होती है। इस तरह की प्रदर्शनी बच्चों को विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराती है और उनमें नए विचारों को विकसित करने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि एवं इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे आने वाले कल का भविष्य हैं। उन्हें जिस प्रकार का वातावरण, शिक्षा और संस्कार दिए जाते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। इसलिए बच्चों को सही दिशा देना, उनकी प्रतिभा को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विज्ञान कौशल प्रदर्शनी विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसी प्रदर्शनियों से बच्चों में कुछ नया करने, कठिन सवालों के उत्तर तलाशने, समस्याओं का समाधान खोजने और अपने विचारों को दूसरों के सामने आत्मविश्वास के साथ रखने की क्षमता विकसित होती है।
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला विद्यार्थी भी अपनी मेहनत, लगन, शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, अनुशासन के साथ पढ़ाई करने और देश एवं समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद आकिब अंसारी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। विज्ञान प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों को स्वयं मॉडल तैयार करने, नई तकनीकों को समझने और अपनी रचनात्मक क्षमता का उपयोग करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने तथा उनमें सीखने की रुचि विकसित करने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के अंत में एम. ए. एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एहसान अहमद ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अतिथियों की उपस्थिति और प्रोत्साहन से बच्चों का उत्साह बढ़ा है। विद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
एम. ए. एकेडमी में आयोजित विज्ञान कौशल प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा को प्रयोगात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और रचनात्मक सोच को नई दिशा मिलती है। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, नए प्रयोग करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करने वाला रहा। बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह विश्वास मजबूत किया कि उचित मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निरंतर प्रोत्साहन मिलने पर विद्यार्थी भविष्य में विज्ञान, तकनीक और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं।इस अवसर पर खुदा बख्श, मुनाजिर हसन, एंटी करप्शन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के मनोज आर्या, एके चौधरी, पत्रकार मोहम्मद साकिब, विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
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