डिजिटल युग मे किशोरों, युवकों,युवतियों,बच्चों को किया गया डिजिटल अरेस्ट:--सुरैया शहाब
बेतिया, बिहार।
आज के इस डिजिटल एवं कंप्यूटराइज युग में युवक, युवतियों,किशोरों,छात्र, छात्राओं,छोटे बच्चों के अलावा स्कूली छात्रों को कंप्यूटर मीडिया के माध्यम से इस डिजिटल के साथ कंप्यूटर के युग में मोबाइल स्क्रीन की लत लगातार बढ़ती जा रही है।विभिन्न अध्ययन एवं विश्लेषणों, सर्वेक्षणों केअनुसारआज के दौर में 6-7 घंटा का समय मोबाइल देखने,गेम खेलने,सोशल मीडिया पर बने रहने के साथ अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बने रहते हैं।मोबाइल का प्रयोग
अधिक रहने के कारण छोटे-छोटे बच्चों में भी अपनी किताबें एवं अन्य पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने कीओर ध्यान नहीं जा पता है।विद्यालय के छात्र/ छात्राओं को भी मोबाइल के माध्यम से उनका होमवर्क,विद्यालय का क्लास का प्रोजेक्ट एवं अन्य वर्ग कार्य करना पड़ता है।यह एक कटुसत्य है कि मोबाइल,इंटरनेट के बढ़ती प्रभाव से पढ़ने- लिखने की पारंपरिक संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है। इस मोबाइल, इंटरनेट की युग ने पत्र पत्रिका,समाचार पत्र को प्रत्येक घर मेंआने का, इसको पढ़ने की संस्कृति ही बदल गई है।इस युग में किशोर, युवक,युवतियों, स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे भीअपने मनोरंजन एवं अन्य जानकारियां मोबाइल के स्क्रीन पर ही सीमित हो गई है।आने वाले समय में दृश्य प्रधान तकनीक से पठन-पाठन संस्कृति को अभूतपूर्व चुनौती दी जा रही है।मोबाइल,इंटरनेट, ओटीटी प्लेटफॉर्म, इंस्टाग्राम, ट्यूटर, वेबसीरीज,शॉर्ट वीडियो के साथ-साथ अनगिनत सोशल मीडिया एप्स ने मनोरंजन,सूचना के संसार को पूरी तरह से बदल दिया है।इस तरह के डिजिटल युग ने सभी पुस्तकालय,वाचनालय, पत्र पत्रिका ,मैगजीन को पीछे छोड़ दिया है।
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